नवम्बर-2017

देशअंदरूनी मामला     Posted: July 1, 2015

वह रोज घर में हो–हल्ला, मारपीट किया करता था। उसके इस व्यवहार से उसके पड़ोसी परेशान रहते थे। उसके परिवार के सदस्य उससे आतंकित होकर पड़ोस में चले जाते थे। उसके आततायीपूर्ण व्यवहार की चर्चा पड़ोसी घरों में आये दिन हुआ करती थी।
उसके परिवार के सदस्यों को शरण देना पड़ोसियों की चिंता या परेशानी का कारण नहीं था। वे परिवार के प्रति उसके दुर्व्यवहार और अत्याचार से चिंतित थे।
जब उसे पता चला कि पड़ोस के हर घर में उसकी शिकायत हो रही है ,तो उसे बहुत बुरा लगा। उसने पड़ोसियों पर टिप्पणी की, ‘‘खबरदार ! मेरे घर–परिवार के बारे में सोचने की किसी को जरूरत नहीं है, यह मेरा अंदरूनी मामला है।’’
एक दिन पड़ोसियों ने मिलकर उसे एक कमरे में बंद कर दिया। तीन दिनों तक भूखे–प्यासे बंद रहने के बाद उसके होश ठीकाने आ गये। उसके पूछने पर पड़ोसियों ने बताया, ‘‘यह समाज का अंदरूनी मामला है।’’ पड़ोसियों ने उससे शर्त मनवाई कि वह कभी अपने परिवार के सदस्यों से दुर्व्यवहार करेगा तो फिर उसे बंद कर दिया जाएगा।
शुरू में वह पड़ोसियों के भय के कारण अपने परिवार के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार करना बंद रखा; लेकिन जल्दी ही ऐसा करना उसकी आदत हो गई।
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