अगस्त-2017

देशअम्मा की छड़ी     Posted: October 1, 2015

उम्रदराज़ लोगों की अक्सर आदतें पक्की हो जाती हैं। आखिर बुजुर्ग चाहते क्या हैं– दवा, दारू और सेवा। तो जनाब अगर कोई सरकारी नौकर या उसकी पत्नी अथवा विधवा है ,तो दवा सरकार मुफ्त में दे ही देती है। दारू ऐच्छिक विशय है और सेवा शब्द तो आधुनिक युग में काफी पुराना प्रतीत होता है। खैर! लड़कियों की मज़बूरी माँ बाप से दूर चले जाना सामाजिक प्रक्रिया के अन्तर्निहित है। ऐसे में अम्मा के 76वें जन्मदिन पर रोशनी की बड़ी बहन तारा बोली–‘‘रोशनी! अम्मा को तोहफे में अगर छड़ी दें तो कैसा रहेगा? बेचारी चलते समय डगमगातीं हैं।’’
रोशनी–‘‘नहीं जीजी! ्शायद अम्मा छड़ी पसन्द न करें ।उन्हें तो वैसे ही सहारा लेने की आदत नहीं है।’’
तारा–‘‘अरे! देख ऐसा है न, औलाद और छड़ी दोनों सहारा देने का काम करती हैं। तो क्यों न हम उन्हें छड़ी उपहार में दें।’’
दोनों बहनों में बहस थम चुकी थी। आखिरकार दोनों बहनें छड़ी ले आईं। छह माह के अन्तर के दौरान जब तारा वापस मायके आई ,तो देखा छड़ी अभी भी ज्यों की त्यों पन्नी में लिपटी कोने में खड़ी है।
-0-
रचना गौड़ ‘भारती’
304, रिद्धि सिद्धि नगर प्रथम,बूँदी रोड, कोटा–राजस्थान

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    rdkamboj@gmail.com

    रचनाएँ भेजने के लिए पता-:-
    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-
    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine