जून-2017

देशान्तरअस्तित्व     Posted: May 1, 2016

[ अनुवाद : सुकेश साहनी]

लम्बे समय से मैं मिस्र की धूल में जिंदगी से बेखबर निष्क्रिय पड़ा था।

तब, सूर्य ने अपने स्पर्श से मुझे जन्म दिया, मैं उठा और जिंदगी के गीत गाते हुए नील नदी के तट पर घूमने लगा।

और अब वही सूर्य झुलसा देने वाली किरणों से मुझे रौंदता है ।ताकि मैं फिर मिट्टी में मिल जाऊँ। पर ये कैसी आश्चर्य भरी बात है! जिस सूर्य ने मुझे जन्म दिया, वही मुझे मिटा पाने में असमर्थ है।

मैं आज भी दृढ़ कदमों से नील के तटों पर घूम रहा हूँ।

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गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

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