जुलाई -2018

देशआँखों देखी     Posted: August 1, 2016

         सुबह का उजाला फैलने लगा था. लम्बी दूरी की ट्रेन ने एक तेज विसिल के साथ प्लेटफार्म छोड़ा ही था कि मेरे कोच में टी.सी. ने टिकिट निरीक्षण करते-करते मेरे सामने की बर्थ पर बैठे हुए पढ़े-लिखे संभ्रात से दिखने वाले, पचहत्तर-अस्सी वर्षीय वृद्ध से टिकिट दिखाने के लिये कहा तो उन्होने टी.सी.की ओर टिकिट बढाई. टिकिट देख कर टी.सी. ने कहा-‘‘ यह तो जनरल कोच का टिकिट है और आप तृतीय श्रेणी के आरक्षित कोच में बैठे हुए है.’

‘‘जी हाँ, आप सच कह रहे है. आप तो मुझे दो स्टेशन बाद आने वाले बिलासपुर स्टेशन तक के लिए एक बर्थ आरक्षित कर दें और जो भी किराया होता हो ,वह मुझसे ले ले.’’

टी.सी. ने टिकिट वापिस करते हुए कहा-‘ वैसे तो बिलासपुर तक का निर्धारित किराया पचहत्तर रुपये होता है, लेकिन आप मुझे केवल पचास रुपये दे दीजिए. मैं बिलासपुर तक इसी कोच में हूँ’

‘ जी नही, आप तो मेरे लिए एक बर्थ आरक्षित कर दे.’ वृध्द ने कहा.

‘देखिए, आपको सीधे-सीधे पच्चीस रुपये का लाभ हो रहा है.’ टी.सी. ने समझाते हुए कहा.

‘ और सरकार को पचहत्तर रुपये का सीधा-सीधा नुकसान हो रहा है.’ वह बुदबुदाया

‘जरा जल्दी कीजिए मुझे और भी यात्रियों की टिकिट चेक करना है. टी.सी. ने पचास रुपयों  के लिये अपना दाहिना हाथ फैलाया.

तभी अचानक वृद्ध अपनी सीट से उठे. अब उनकी तेज एवं गंभीर आवाज पूरे कम्पार्टमेंट में गूँज रही थी .वे टी.सी. से कह रहे थे -‘ आपको हमारी सरकार क्या कुछ नही देती ? सुंदर, निर्धारित यूनिफार्म, बढिया वेतन, वर्ष में एक बार तगड़ा बोनस, वर्ष भर तरह-तरह के अवकाश, रहने को सरकारी मकान, जीवन भर आपको एवं आपके परिवार को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा, मुफ्त रेल यात्राएँ, सेवानिवृत्ति  के पश्चात् पेन्शन, मृत्यु बाद पत्नी को पेन्शन और परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति, इसके अतिरिक्त अनेकानेक सुविधाएँ, इसके बदले में आप सरकार को क्या दे रहे है ? रिश्वत लेकर सरकार को आर्थिक हानि ! शर्म आनी चाहिये आपको.’’

भयभीत टी.सी. ने पचहत्तर रुपये वृद्ध से लेकर उसे टिकिट देते हुए सर झुका कर तेजी से दूसरे कम्पार्टमेंट की ओर चल दिया. यात्रियों ने पहली बार किसी रिश्वत लेने वाले को इस तरह सर झुका कर भागते हुए देखा था. अब वे खुश होकर उस वृद्ध को प्रशंसा भरी नजरो से देखते हुए, अपने स्थान से खड़े हो कर उनके सम्मान में ताली बजा रहे थे जिनमें मैं भी शामिल था ।

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