अगस्त-2017

देशइश्क , आशिक और क़िताब     Posted: March 1, 2017

उसे देखते ही वह चहक पड़ी , “हाय सत्या , किधर भागे जा रही हो ?”

“बस तेरे पास ही आ रही थी | बहुत दिन हो गए , सोचा तेरी क़िताब आज वापस कर दूँ |”

“अरे छोड़ यार क़िताब-विताब की बात ……..बता क्या हाल है ? ….आज तू बड़ी खुश दिख रही हो …क्यों ?”

“नहीं सुमि , ऐसी कोई बात नहीं है …..

“मैं नहीं मानती |….तेरा मुखड़ा आज कुछ बोल रहा है |”  उसके कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसायी , “कहीं कोई दिल –विल …..”

“चल हट , तुझे तो यही सूझती रहती है ….” कहने के साथ उसके गालों पर सुरमई लाली दौड़ गई | उसके चेहरे का भाव सुमि की आँखों से छुप न सका | जानने की बेकली में इजाफ़ा हुआ , “ देख सत्या , तूने वो शे’र सुना है न , ‘इश्क , मुश्क छुपाए…’ |”

“तो फिर इतनी ज़ल्दी क्या है ! कभी-न-कभी मालूम हो ही जाएगा |”

उसका हाथ पकड़ कर एक किनारे बिठाते हुए सुमि ने उसे कुरेदा , “देख मेरी जान , उस ‘कभी’ का इंतज़ार तेरी सहेली नहीं कर सकती |” उसका मुखड़ा अपनी ओर घुमा कर उसकी आँखों में झाँका , “बता वो खुशनसीब कौन है ?”

“तो , तू नहीं मानेगी !” उसके होंठों पर मुस्कान खेल गई |

“बिल्कुल नहीं ….बता न !” सुमि का सब्र ज़वाब दे रहा था |

“तो सुन ! ….निखिल श्रीवास्तव !”

“ कौन निखिल ? ….नेहरू कॉलोनी वाला ?”उसकी साँसें अटक गई |

“हाँ , सुमि |”

वह कुछ पलों तक सत्या के चेहरे को एकटक देखती रही | चेहरे का भाव बदल गया | आवाज़ में रूखापन आ गया , ‘ मैं पूछती हूँ क़िताब वापस करने में इतनी देर क्यों लगा दी ?…..क्या यही तेरा मैनर है ? एक तो मांग कर ले गई ,ऊपर से …..आइन्दा क़िताब मांगने की जुर्रत न करना समझी !” और वह पैर पटकती हुई दनदनाती हुई आगे बढ़ गई |***

*अपर बेनियासोल , पो. आद्रा , जि. पुरुलिया , पश्चिम बंगाल 723121, मो.09800940477

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