फ़रवरी-2018

देशकलाकृति     Posted: February 1, 2018

“यार अपने बॉस का दिमाग ख़राब हो गया है कैसी कैसी कलाकृतियों को लाकर ऑफिस में सजा देता है । ” अखण्ड ने अपने साथी से कहा ।

“अब तुझे क्या हो गया है,ऑफिस में काम करने आता है या यह सब देखने । मेरे पास फालतू समय नहीं है , साथी मित्र इतना कहकर चला गया ।

अखण्ड को एक कलाकृति पसन्द नहीं आ रही थी , जिसमें एक आदमी अपने ही कटे हुए सर  को लिए बैठा है ।अखण्ड अपनी टेबल पर आ तो गया पर बार बार उसका ध्यान उन कलाकृतियों की तऱफ ही था।

तभी चपरासी ने आकर कहा ,” अखण्ड जी!  आपको बॉस बुला रहें है ।”

चपरासी की तरफ़ देखकर वह बोला , “क्या हुआ ? ”

“मुझे क्या पता , आप जानो बॉस जाने ।” इतना कहकर वह चला गया ।

अखण्ड बॉस के केबिन की तरफ़ जाते जाते आस पास सभी को देख रहा था। सब अपने अपने काम में व्यस्त थे ।

उसने बॉस के दरवाज़े पर क्नॉक किया । कुछ पल के बाद वह उनके केबिन में था ।

“अखण्ड , तुमसे मैं कितनी बार कह चूका हूँ कि अपने काम को ध्यान से किया करो , और एक तुम हो कि खुद को बदलने को ही तैयार नहीं हो । पिछली बार भी तुम्हारे बनाये बैलेंस शीट में गड़बड़ थी , वो तो भला हो सुकेश का जिसने सही कर दी । ”

” वो….. बॉस .. इस बार तो मैंने ध्यान से बनाई है ।”

“क्या ख़ाक बनाई है ? यह देखो कितनी गलतियां की हैं तुमने ।”

सामने उसके द्वारा किया गया काम था । और ज़हन में वही कलाकृति, जिसमें धड़ से अलग किया हुआ सर पकड़े वह आदमी उसको देखकर मुस्कुरा रहा था।

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