नवम्बर-2017

देशकामवाली बाई     Posted: May 2, 2017

  1.              आज सुनीता बेहद ही प्रसन्न थी । मुख्यद्वार के सामने बैठी हँस–हँसकर फोन पर अपनी खुशी का इज़हार  रिश्तेदारों और दोस्तों से कर रही थी । सभी लोग उसके बढ़े हुए वेतन पर बधाइयाँ दे रहे थे ।  इस बीच काम वाली बाई दरवाजे पर दिखाई दी । सुनीता का सुर और भाव-भंगिमा अचानक बदल गए ।

“ हाँ रश्मि, ‘देखो पर महँगाई कितनी बढ़ गई है!  जितना मिलता वो भी कम पड़ जाता है ।‘

-0- भारतीय जीवन बीमा निगम,शाखा – बड़वाह ( म.प्र )-451551 ,9425478044

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    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
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