अगस्त-2017

देशचार अक्षर     Posted: September 1, 2015

‘‘छोड दीजिए, पत्नी पर हाथ नहीं उठाना चाहिए।’’ बीच-बचाव करते हुए सुधाजी बोली थीं।
‘‘अरे! ये ऐसे नहीं सुधरने वाली। कहते हैं न-‘रहिमन कड़वे मुखन को चहियत यही सजाय8’’ ललन जी दलील देने लगे थे।
‘‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता;’’ ये भी तो कहते हैं। हिलक-हिलककर रो रही वसुधाजी के आँसू पोंछते हुए सुधाजी क्षोभ से भर गई थीं।
‘‘आप लोग भी चार अ़़क्षर पढ़ क्या लेती हैं, अपने को काबिल समझने लगती हैं।’’
‘‘औरत भला काबिल कैसे होगी चार अक्षर पढ़कर! काबिल तो आप पुरुष लोग होते हैं न? चाहे चार अक्षर पढ़े हों तो भी चाहे अक्षर आप लोगों के लिए भैंस बराबर ही क्यों न हों। ’’ललनजी बिलबिला उठे थे।

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    rdkamboj@gmail.com

    रचनाएँ भेजने के लिए पता-:-
    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-
    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine