जून-2017

संचयनचोर-संहिता     Posted: May 1, 2015

‘‘मारो…मारो…..सालों को….।’’
भीड़ दो चोरों को मार रही थी। पहला मरियल, कमजोर चोर रिरिया रहा था, ‘‘म म…..मुझे छो…ड़–दो। मैं तुम्हारे..पाँव …पड़ता हूँ। अरे मार….डा…ला…रे।’’
दूसरा कड़ियल बलिष्ठ चोर, मजबूरन पिट तो रहा था, परन्तु पीटती हुई–भीड़ को घूर–घूर कर देखने का प्रयास कर रहा था।
थोड़ी देर में दूसरे चोर की बलिष्ठ काया, घूरती नज़र का असर होने लगा। भीड़ ‘सेफ गेम’ खेलती हुई बलवान चोर को छोड़ कर, निर्बल चोर की पिटाई में जुट गई।
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गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

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    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

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    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
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