अप्रैल-2017

देशचोर     Posted: March 1, 2017

पत्नी ने कमरे में घुसते हुए कहा- ‘‘सुनते हो जी ,मैं कई दिन से देख रही हूँ एक औरत और एक आदमी शाम ढलते ही हमारे घर के आगे से गुजरते हैं…’’
index‘‘इसमें कौनसी बड़ी बात है। दिन में न जाने कितने लोग यहाँ से गुजरते होंगे…’’.
‘‘आप तो किसी बात को सीरियस लेते ही नहीं । आपसे तो कुछ कहना ही बेकार।’’ इतना कह पत्नी वापिस जाने लगी।
तभी पति ने हाथ पकड़कर पास बिठाते हुए कहा, ‘‘इतनी जल्दी नाराज हो जाती हो अच्छा बताओ, क्या कहना चाहती हो?’’
‘‘आजकल किसी का कोई भरोसा है। दिन में मकान के चारों ओर से देख लेतेे हैं और रात को सेंध लगा देते हैं। वैसे भी शहर में कहीं ना कहीं चोरियाँं हो रहीं हैं।’’ पत्नी ने किसी आशंका का लबादा ओढ़ते हुए कहा।
‘‘तुम्हें लगता है वे चोर होंगे?’’
‘‘अब किसी के अन्दर तो घुसा नहीं जाता। खुद सोचिए, वे हमारे घर से थोड़ी आगे तक जाते हैं, फिर वापिस आ जाते हैं। इस तरह कई चक्कर लगाते हैं।
‘‘हो सकता हो सैर करने आते हों।’’
‘‘सैर करते, तो आगे भी कितनी लम्बी-चौड़ी सड़क पड़ी है, वहाँ तक जा सकते हैं।’’
‘‘ठीक है, जब वे शाम को आयेंग,े तो मैं बात करूंगा।’’
शाम को जैसे ही वे घूमने आए तो पति ने उन्हें रोकते हुए पूछा -‘‘भाई साहब, आप इधर नए आए हैं क्या?’’
‘‘हाँ, आपके मकान के पीछे वाली गली में रहते हैं।’’
‘‘अच्छा, तो सैर करने निकले हैं ?’’
‘‘हाँ।’’
‘‘तो एक बात पूछ सकता हूँ?’’
‘‘क्यों नहीं।’’
‘‘ जब आप घूमने ही निकलते हैं ,तो इससे आगे दूर तक सड़क जाती है तो वहाँ तक जा सकते हैं। आप तो यहीं से वापिस हो जाते हो?’’
‘‘अरे भाई साहब , इसका कारण आपका घर है।’’
यह सुनते ही तुरन्त पत्नी ने पति से नजर मिलाई, मानो कह रही हो-‘‘देखा मैं कहती थी ना, इनकी नजर हमारे मकान पर टिकी है।’’
‘‘मतलब मैं समझा नहीं …हमारे मकान पर निगाह।’’ पति ने अपनी बात पर कुछ जोर देते हुए कहा।
‘‘अरे भाई साहब, आप किस्मतवाले हैं। आपके आँगन में फूलों से लदी कितनी सुन्दर बेल हैं। इनकी खुशबू पूरे मोहल्ले को महका रही हैं…. मैं तो जैसे ही  ड्डयूटी से आता हूँ, थोड़ी देर बाद ही  खिंचा चला आता हूँ यहाँ। मेरी पत्नी भी प्रकृति प्रेमी है। हमारा तो मन करता है आपके घर से दूर ही न जाए। आह! मोगरे के फूलों की क्या खुशबू आ रही है। भाई साहब, हम तो चोर हैं आपके फूलों की खुशबू के….’’
‘‘अरे भाई साहब, हमें माफ करना। हमने आपको वैसे ही टोक लिया। आप तो बड़े भले आदमी हैं। आइए, अन्दर आइए चाय लीजिए।’’ और फिर वे किसी बात पर ठहाका लगाते हुए अन्दर चले गए।

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