नवम्बर-2017

देशान्तरजि़न्दगी भर     Posted: March 1, 2015

(अनुवाद: सुकेश साहनी)

पूर्णिमा का चाँद जैसे ही अपनी खूबसूरती के साथ उस शहर पर उगा, सभी कुत्ते उसकी ओर देखकर भौंकने लगे।
केवल एक कुत्ता नहीं भौंका और गंभीर आवाज़ में दूसरे कुत्तों से बोला, ‘‘चाँद की नींद नहीं टूटेगी और न ही तुम भौंक कर उसे द्दरती पर ला सकोगे।’’
इस पर सभी कुत्तों ने भौंकना बंद कर दिया और वहाँ विचित्र–सी चुप्पी छा गई लेकिन वह अकेला कुत्ता रात भर उन्हें मौन रहने की हिदायतें देता हुआ भौंकता ही रहा।

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

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    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
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    -सम्पादक द्वय

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