सितम्बर-2017

देशतब क्या होगा ?     Posted: April 1, 2017

  सबके सामने वह  मेहताजी की लड़की को उठाकर ले गया । कोई कुछ नहीं बोला ।

लड़की खूब रोई ,चीखी चिल्लाई ; लेकिन किसी के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगी ।

मौहल्ले वाले मूक – दर्शक बने देखते रहे ।

“ किसे पुकार रही हो मेरी जान , ये तो साले सबके सब नामर्द हैं ! ” उसने

लड़की को चीखते – चिल्लाते हुए देखकर कहा और रामपुरी को हवा में लहराते हुए चारों

ओर निगाहें दौड़ाई ।

कोई भी आगे नहीं आया । सब खामोश थे । वह बड़े आराम के साथ लड़की से

जुगाली करता हुआ निकल गया ।

मोहल्ले वाले मेहता जी से कुछ नहीं कर पाने का अफ़सोस प्रगट कर रहे थे ।

आँसुओं से भीगा चेहरा मेहता जी ने ऊपर उठाया और एक नजर सबको देखा

“ मुझे अफ़सोस इस बात का नहीं हैं कि आप सब मेरी बेटी को बचा न सके !

अफ़सोस इस बात का है कि मेरी एक ही बेटी थी और उसे आज वह उठाकर ले गया ।

लेकिन वह कल फिर आएगा तब क्या होगा ? ”

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    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
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