अगस्त-2017

संचयनतुम भी तो     Posted: July 1, 2015

””कौन कमबख़्त सोयेगा, जब तुम मेरे घर आ जाओगी?”
””देखो तो, तब तुमने क्या लिखा था खत में?” – काया हँसते हुए बोली।
शादी की 25वी वर्षगाँठ पर पुराने खतों की पेटी निकालकर पति-पत्नी
पढ़ रहे थे।
””और यह देख मोटी, तूने भी तो लिखा था, मैं हमेशा ऐसी ही बनी रहूँगी जैसी अब हूँ। कभी नहीं बदलूँगी और देख तो आईना, कितना बदल गई।” हँसते हुए सुनील ने कहा तो बात दिल को लग गई। बात भावनाओं के बदल जाने की कही थी, न कि शारीरिक संरचना की।
आईना भी चुगली कर रहा था, आँखों के नीचे के काले घेरे। कमर के चारों तरफ मोटा टायर नुमा घेरा, डबल गर्दन, आँखें नम हो गईं काया की।
””उफ़्फ़! मैं ही कौन-सा सलमान खान लग रहा हूँ। हम दोनों जैसे भी लग रहे हैं, परफेक्ट हैं, मेरी मोटो।” – कहते हुए सुनील ने उसे बाँहों में थाम लिया और वह भाव-विभोर हो सोचने लगी ””हाँ, मैंने तो कभी ध्यान ही नहीं दिया कि इनके सर पर भी अब उतने बाल नहीं।”
””आ चल ना, अगला खत पढ़ते हैं।”
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