अगस्त-2017

संचयनथप्पड़ और पूरी     Posted: March 1, 2015


उस दिन मैं एक शादी में भोजनोपरांत बाहर गेट के पास खड़ा कुल्ला कर रहा था कि एक पुरुष स्वर सुनाई पड़ा ,‘‘मार साले को, न जाने कहाँ से चला आया।’’पर, न जाने क्या सोचकर उसने एक लड़के से कहा,‘‘इसे दो लड्डू देकर चलता कर। ’’
मैंने मुड़कर देखा तो पाया कि एक भिखारीनुमा बालक शामियाने में घुसने का प्रयास कर रहा था। मालिक ने उसे ऐसा करते हुए देख लिया था। मालिक ने जिस लड़के से कहा था, वह भी बड़ा उस्ताद निकला। उसने पहले तो बालक को एक थप्पड़ जड़ा , फिर उसके हाथ में दो लड्डू थमाते हुए कहा,‘‘ भाग जा यहाँ से ।’’
लड्डू लेकर बच्चे ने बड़ी ही मासूमियत के साथ कहा,‘‘ बाबू जी! एक थप्पड़ और मार लीजिए…..पर, दो पूरियाँ दे दीजिए।
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