जून-2017

देशदूध का गिलास     Posted: October 1, 2015

” मैं खाना लगाती हूँ इतने आप हाथ-मुँह धो लो ”
रमेश मुँह धोकर गुसलखाने से निकला तो खाना परोस लाई ।
थाली में से रोटी का टुकड़ा तोड़ते हुए रमेश बोला :
” गीता , क्या बाबू जी गए थे आज अस्पताल में डॉक्टर को चेक कराने ?”
” जी , डॉक्टर ने ऑपरेशन के कारण कमजोरी बताई है । माँ जी कह रही थी कि अब से अपने पापा को दो वक़्त दूध दे दिया कर । अब तुम ही बताओ घर में इतना दूध कहाँ से आये ?”
खाते-खाते रमेश थोडा रुक गया ।
” चुन्नू भी अभी छोटा है तो उसे भी दूध चाहिए वरना अभी से उसमें कमजोरी बैठ जाएगी ”
” हाँ ” रमेश का मन कुछ उधेड़बुन में लग गया ।
अगली रात ऑफिस से आकर मेज पर अपना बैग टिकाते हुए रमेश बोला :
” कल से थोडा देरी से आया करूँगा , ऑफिस वालों ने टाइम बढ़ा दिया है ”
” तुम और तुम्हारे ऑफिस वाले भी ना बस…..”
” अच्छा मैडम जी , अब खाना तो खिला दो ” रमेश ने थोडा मनाते हुए बोला ।
” अच्छा एक बात और , खाना खाते ही नींद चढ़ जाती है भई , तो इस वक़्त दूध मत दिया करो छाती पर भारीपन सा हो जाता है ”
” और कमजोर हो जाओगे , चलो मुझे क्या लेना…..”
” तुम्हारे होते मुझे कुछ नहीं हो सकता मैडम जी ” रमेश ने उसे पीछे से बाहों में लेते हुए कहा ।
” पार्ट टाइम काम से कुछ आमदनी भी बढ़ जाएगी और वैसे भी इस बुढ़ापे में बाबू जी को मुझसे ज्यादा दूध की जरुरत है “- बिस्तर पर सोचते-सोचते जाने कब उसकी आँख लग गई……
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कुणाल शर्मा ”अनजान”,137, पटेल नगर( जण्डली ),अम्बाला सिटी 134003;( हरियाणा )

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