अप्रैल-2018

देशपहचान     Posted: September 1, 2016

उसका चेहरा एक साथ कई लोगों से मिलता-जुलता था जिसकी वजह से वह कई लोगों को कई दूसरे लोगों की याद दिलाता था ।
उसकी पहचान भी अजीब थी । दक्षिण वाले उसे बंगाली समझते थे । बंगाल वाले उसे तमिल मानते थे । पंजाबी उसे हिन्दी-भाषी समझते थे जबकि हिन्दी वालों ने उसे कभी अपना समझा ही नहीं था ।
किसी को उसकी आँखों में किसी और की आँखों की झलक मिलती । किसी को उसकी नाक या ठोड़ी जानी-पहचानी लगती तो किसी को उसके होठ और उसका हेयर-स्टाइल किसी और की याद दिला देते ।
कोई उसके बातचीत करने के अंदाज़ से उसे कोई और समझ लेता तो कोई उसकी वेश-भूषा देख कर धोखा खा जाता ।
अक्सर जब वह अपना परिचय देता तो सामने वाला चौंक कर कहता —
” अरे, आप ”” ये ”” हैं ? मैं तो आपको ”” वो ”” समझता था ! ”

”” ये ”” या ”” वो ”” उसका पेशा, उसका राज्य या उस से जुड़ा कुछ भी हो सकता था ।
लोग उसकी उम्र को लेकर भी धोखा खा जाते थे । कुछ लोग उसे तीस-बत्तीस का समझते, कुछ उसे चालीस के आस-पास का मानते जबकि बाक़ी उसकी सही उम्र का अंदाज़ा ही नहीं लगा पाते ।
” आप बालों को ”” डाई ”” करते हैं या ये नैचुरली इतने काले हैं ? ” अक्सर लोग उससे पूछ बैठते ।
उसके शादी-शुदा होने या न होने को लेकर भी लोगों में असमंजस और संदेह की स्थिति बनी रहती । यह तब तक रहती जब तक वह स्वयं आपको अपनी सही स्थिति नहीं बता देता । हालाँकि उसके सही-सही बता देने के बाद भी आधे लोग यह मानने को तैयार नहीं होते कि उसने सही कहा है ।
और तो और , उसका नाम भी अजीब था । नाम से वह कुछ लोगों को गोवा का बाशिंदा लगता , कुछ को केरल का । जब तक वह खुद न बता दे कि वह कहाँ का था , भ्रम की स्थिति बनी रहती । हालाँकि उसके बता देने के बाद भी कुछ लोगों के मन से संदेह पूरी तरह ख़त्म नहीं होता था ।
वह खुद खिली हुई धूप-सा , चलती हुई हवा-सा , बहती हुई नदी-सा था । वह जब जहाँ होता , वहीं का हो जाना चाहता था ।
-0-सुशांत सुप्रिय ,    मार्फ़त श्री एच. बी. सिन्हा ,5174 , श्यामलाल बिल्डिंग ,   बसंत रोड, ( निकट पहाड़गंज ) , नई दिल्ली -110055

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    chandanman2011@gmail.com

    रचनाएँ भेजने के लिए पता-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine