अक्तुबर-2017

देशान्तरपेशबन्दी     Posted: August 1, 2017

 

पहली वारदात नाके के होटल के पास हुई। फौरन ही वहाँ एक सिपाही का पहरा लगा दिया गया।

दूसरी रोज शाम को स्टोर के सामने हुई। सिपाही को पहली जगह से हटाकर दूसरी वारदात के मुकाम पर नियुक्त कर दिया गया।

तीसरा केस रात के बारह बजे लाण्डरी के पास हुआ।

जब इन्सपेक्टर ने सिपाही को इस नई जगह पहरा देने का हुक्म दिया तो तो उसने कुछ देर गौर करने के बाद कहा, ‘‘मुझे वहाँ खड़ा कीजिए, जहाँ नई वारदात होने वाली हो।’’

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गतिविधियाँ

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    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

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