सितम्बर-2017

देशप्रगति     Posted: July 1, 2017

विद्यार्थियों ने हड़ताल कर दी। प्राचार्य बहुत दुःखी थे। उनका अन्तर्मन आहत था। विद्यार्थियों को सहलाते हुए उन्होंने आहिस्ता.आहिस्ता अपनी समझाइश शुरू की-‘‘आप लोग हड़ताल क्यों कर रहे हैं ? मेरे पास आकर पहले बात तो कर लेते । मैं इस महाविद्यालय की प्रगति के लिए क्या नहीं कर रहा हूूँ ? आप लोगों के लिए क्लासरूम कम पड़ते थे। क्या मैंने चार नये क्लास रूम नहीं बनवाये ?
‘‘यस सर, बनवाये हैं।’’ छात्रों ने हामी भरी।
‘‘मैंने इतनी लिखा-पढ़ी करके कॉलेज को ढाई लाख रुपये की यू.जी.सी. ग्रांट नहीं दिलवाई’’?
‘‘यस सर’’।
‘‘क्या मैंने प्रयोगशाला में नये उपकरण नहीं मँगवाए हैं’’?
‘‘यस सर’’।
‘‘क्या मैंने फर्नीचर की कमी को दूर नहीं किया’’?
छात्र हामी भरते रहे।
‘‘मैं इस महाविद्यालय की प्रगति के लिए चौबीस घण्टे सोचता रहता हूँ, चाहे घर पर हूँ या कॉलिज में । मैं सभी तरह की सुविधाएँ जुटा रहा हूँ, मगर आप हैं कि….’’।
‘‘मगर सर, क्लासेज़ भी लगनी चाहिए न ? क्लासेज कभी लगती ही नहीं ”- छात्रों ने बात काटते हुए कहा ।
-0-
बी. एल. आच्छा, 36 क्लेमेंस रोड , सर्वाना स्टोर्स के पीछे,पुरुषवाक्कम , चेन्नई .600007

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    rdkamboj@gmail.com

    रचनाएँ भेजने के लिए पता-:-
    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-
    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine