सितम्बर-2017

देशबैठेंगे     Posted: September 1, 2017

मरीज़ का रिश्तेदार , डॉक्टर के क्लिनिक पर फोन करते हुए-डॉक्टर साहब शहर में हैं?

हाँ ।

किसी मीटिंग में तो नहीं?

ना ।

बैठे हैं ?

हाँ ।

मरीज़ देख रहे हैं?

हाँ ।

मरीज़ का रिश्तेदार , डॉक्टर के चेम्बर के बाहर से फोन करता है-डॉ साहब आ रहे हैं?

नहीं, जा रहे हैं ।

कहाँ ?

अस्पताल ।

हमने पूछा तो आपने कहा कि बैठे हैं।

हाँ, बैठे तो अब भी हैं गाड़ी में। अस्पताल जा रहे हैं ।

वहाँ भी बैठेंगे?

हाँ ।

फिर?

थिएटर में जाएँगे।

कितने घण्टे के लिए?

तीन घण्टे के लिए ।

उसके बाद बैठेंगे?

भाई साहब सवाल थोड़े कम कीजिए और मरीज़ को अस्पताल ले जाइए। ऐसा न हो कि आप वहाँ पहुँचो, पता चले कि डॉक्टर साहब गाड़ी में बैठे हैं और घर आ रहे हैं।

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    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

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