दिसम्बर-2017

संचयनमाँ का मतलब     Posted: June 1, 2015

माँ का मतलब
“दूध ढाई किलो लेना है, याद करके ले लेना, अच्छा !” स्कूल जाने के लिए, तैयार होते हुए, पत्नी ने मुझ से कहा-“पतीला धोकर फ्रि़ज पर रख दिया है।”
”आज ढाई किलो क्यों ?” मैंने पूछा, तो पत्नी ने झुँझलाकर उत्तर दिया-“क्योंकि आज बच्चे हॉस्टल से घर आ रहे हैं; लेकिन आपको कुछ याद रहे तब न !”
”केले और सेब निकालकर रख दिए हैं, खुद भी खा लेना और बच्चों को भी खिला देना”- तैयार होकर चलते-चलते पत्नी ने कहा।
“अच्छा ठीक है, खिला दूँगा।” मेरी भाव-भंगिमा देखकर पत्नी आश्वस्त हो गई थी।
लेकिन थोड़ी दूर जाकर वह लौट आई, तो मैंने पूछा-“अब क्या रह गया ?”
“मिठाइयों के लिए तो कहना भूल ही गई थी। बच्चों के आने से पहले, बाज़ार जाकर, उनकी पसन्द की ताज़ी मिठाइयाँ ले आना।” उन्होंने अन्तिम निर्देश दिया था।
“मिठाइयाँ भी ले आऊँगा। और कुछ ?”
“मेरे आने तक इतना ही कर लेना, बाक़ी मैं आकर सँभाल लूँगी। ……मेरी परीक्षा में ड्यूटी न होती, तो मैं खुद छुट्टी ले लेती, आपको छुट्टी लेने के लिए न कहती।” पत्नी के स्वर में स्पष्टीकरण के साथ-साथ व्यथा और विवशता भी थी।
और तब, पत्नी के जाने तथा बच्चों के आने के बीच, मैं माँ होने का मतलब खोजता रहा।
-0-

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    rdkamboj@gmail.com

    रचनाएँ भेजने के लिए पता-:-
    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-
    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine