जून-2017

संचयनमानदंड     Posted: May 1, 2015

चलती हुई बस को एक यात्री ने हाथ दिया, बस रुक गई, यात्री बैठ गया। थोड़ी दूर चलने पर, एक और यात्री ने बस को रुकने का इशारा किया, बस रुक गई, दूसरा यात्री भी बैठ गया।
दूसरे यात्री के बस में बैठते ही, पहला यात्री बड़बड़ाया, ‘‘हुँ ह…सिटी बस तो भी इससे अच्छी होगी। जहाँ चाहा, वही रोक दिया। बाप की गाड़ी….।’’
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गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    rdkamboj@gmail.com

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    -सम्पादक द्वय

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