नवम्बर-2017

संचयनयक्षप्रश्न     Posted: March 1, 2015

गाँव में रघबीर की घोड़चढ़ी हो रही थी।जब वे मंदिर के पास पहुँचे तो गाँव के कुछ मनचले सवर्ण जाति के लड़कों ने उसे घोड़ी से उतार लिया और घोड़ी को भगा दिया।
दलितों ने उनका विरोध किया।
सवर्णों ने अपनी धौंसस दिखाने के लिए उनकी धुनाई कर डाली।
दलित अब पहले वाले दलित तो रहे नहीं कि अपमान का घूँट पीकर चुपचाप घर बैठ जाते। वे मैडिकल करवाकर थाने पहुँचे और उनके विरुद्ध केस दर्ज करा दिया।
जब पुलिस उन्हें गिरफतार करने घर पहुँची तो उनकी नींद टूटी । वे यह भी जानते थे कि जो अपराध उन्होंने किया है, इसमें कई साल के लिए जेल जाना पड़ सकता है।
सवर्णों की बैठके होने लगी। और दलितों से माफी माँगने लगे कहने लगे- बच्चे हैं, गलतियाँ कर देते हैं। अतः इन्हें माफ कर दो।
पर, दलित टस से मस न हुए।
एक दिन गाँव में बहुत बड़ी पंचायत हुई। रघवीर पर समझौते के लिए दबाव बनाया गया।
रघबीर खड़ा हुआ और कहने लगा, ‘‘मैं समझौता कर सकता हूँ, पहले यहाँ बैठे सभी बुद्धिजीवी बुजुर्ग मेरे एक प्रश्न का उत्तर दें। पहले मुझे मेरा कसूर बताएँ?’’
पंचायत में मूर्छा-सी छा गई। लगता था किसी के पास उसके प्रश्न का कोई उत्तर न था।
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