दिसम्बर-2017

चर्चा मेंलघुकथा में लोक मांगलिक चेतना होना जरूरी है     Posted: October 1, 2017

CHARCHA MEN डॉक्टर रमेश चंद्र की लघुकथाएँ सादगी से भरी हुई है। जैसा उनका सहज जीवन है, वैसी ही उनकी लघुकथाएँ हैं ।उनका जीवन उनकी लघुकथाओं में प्रतिबिंबित होता है। उनकी लघुकथाएं जनपक्षधर हैं ,और लघुकथा में लोक मांगलिक चेतना होना जरूरी है। उसी से जन जागृति आती है। यह बात वरिष्ठ कथाकार सूर्यकांत नागर ने ‘क्षितिज’ संस्था द्वारा आयोजित डॉक्टर रमेश चंद्र के लघुकथा संग्रह ‘ मौत में जिंदगी ‘ के लोकार्पण प्रसंग पर, अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहीं। उन्होंने यह भी कहा कि, लघुकथा को किसी नियमावली में नहीं बाँधा जा सकता। शिल्प के स्तर पर निरंतर प्रयोग हो रहे हैं, और प्रयोग से ही प्रगति होती है।

कार्यक्रम के अतिथि के रुप में खंडवा से पधारे कवि डॉक्टर प्रताप राव कदम ने पुस्तक की लघुकथाओं के शिल्प की तारीफ की, और कुछ महत्त्वपूर्ण लघुकथाओं का ज़िक्र भी किया । डॉक्टर पुरुषोत्तम दुबे ने कहा कि, इन लघुकथाओं में प्रतीकात्मक स्तर पर कई बातें कही गई हैं, और पौराणिक व्यंजनाओं का सशक्त इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने’ कबीर का फाइव स्टार होटल ‘ लघुकथा की विवेचना की। डॉक्टर योगेंद्रनाथ शुक्ल ने पुस्तक पर चर्चा करने के साथ ही उन साहित्यिक षड्यंत्रों का जिक्र किया, जो प्रेमचंद को साहित्य से खारिज करने की बात करते हैं । उन्होंने कहा कि आज के लेखकों ने अपनी लाइन बड़ी करने के लिए इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए। पुस्तक पर समीक्षा आलेख में कवि ब्रजेश कानूनगो ने कहा कि, रमेश जी सचमुच मानवीय रिश्तों और मानवीय प्रवृत्तियों से संवेदित होकर सरल रुप से अपनी अनुभूतियों को लघुकथा का स्वरूप देते हैं। उन्होंने कहा कि लेखक एक व्यंग्यकार भी है और जब एक व्यंग्य दृष्टि सम्पन्न लेखक किसी अन्य विधा में अपनी बात कहता है तो वहां भी व्यंग्य के उपस्थित होने की अपेक्षा पाठक को हो जाती है।श्रीमती ज्योति जैन ने लघुकथाओं को सांकेतिक बताते हुए कहा कि, वह कम शब्दों में पुरअसर तरीके से अपनी बात कहती है ।उनकी दो रुपए तथा पेड़ औऱ मनुष्य लघुकथाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि इनमें सांकेतिक माध्यमों का उपयोग किया गया है। डॉ रमेशचंद्र ने अपनी लघुकथाओं का वाचन किया । पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया।

कार्यक्रम का संचालन सतीश राठी ने किया ।  कार्यक्रम में सर्वश्री राकेश शर्मा संपादक वीणा, सुरेश उपाध्याय, प्रदीप मिश्र, रजनी रमण शर्मा, हरेराम वाजपेई ,तीरथ सिंह खरबंदा, अशोक शर्मा ,कविता वर्मा ,अश्विनी कुमार दुबे अंतरा करवड़े आदि कई साहित्यकार उपस्थित थे । उज्जैन से साहित्य मंथन संस्था के साहित्यकार रमेश चन्द्र शर्मा एवं मित्रगण भी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए थे।

प्रस्तुति- सूर्यकांत नागर

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    rdkamboj@gmail.com

    रचनाएँ भेजने के लिए पता-:-
    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-
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    -सम्पादक द्वय

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