नवम्बर-2017

देशलार पर आघात     Posted: November 1, 2017

चौथा   पुरस्कार  प्राप्त  लघुकथा

रेलवे प्लेटफॉर्म  पर मेरे  पास खड़े   उस साधारण से आदमी ने जैसे   ही  बीड़ी   का  बंडल जेब से निकाला, मैंने   जोर  से  उसे  टोक दिया,‘अब्बे,  स्टेशन पर बीड़ी  पिएगा   तो पकड़ा जाएगा, पैनल्टी  भरनी   पड़ेगी।’ घबराकर सहमति में   सिर हिलाते हुए उस आदमी ने बंडल वापस जेब में  डाल  लिया।

स्थिति निहार  तेजी  से  हमारे पास आता एक वर्दीवाला,  बीड़ी   के बंडल को फिर   जेब में   जाता   देख एकाएक  हड़बड़ा   गया।

मैंने   प्रशंसा की  उम्मीद में   वर्दीवाले  की   ओर  देखा लेकिन उसकी कहर भरी  निगाहें  मेरे  चेहरे   पर तीव्र से  तीव्रतम  होती  चली गईं।

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मो  :   9224816096

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

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    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    rdkamboj@gmail.com

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    -सम्पादक द्वय

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