अगस्त-2017

देशवन महोत्सव     Posted: December 1, 2015

हर साल की तरह वन महोत्सव मनाया जा रहा था. वृक्षारोपण कार्य के बाद राज्यपाल महोदय ने भाषण दिया. अन्य मुख्य आगंतुकों का भी भाषण हुआ. सभी के भाषण प्राय: एक जैसे थे. उसका सारांश था, ‘‘जितने अधिक वृक्ष होंगे, पर्यावरण उतना ही स्वच्छ रहेगा. वृक्ष ऊंचे होंगे, वृष्टि उतनी ही अधिक होगी. वृक्षों की संख्या बढ़ने से लकड़ी एवं जलावन की समस्या का समाधान होगा ही, वन्यप्राणियों को भी सुरक्षा मिलेगी. इसलिये आज आवश्यकता इस बात की है कि हर बच्चा अपने जन्मदिन पर या उसकी याद में हर साल कम से कम एक वृक्ष अवश्य लगावे. जिस तरह नया वृक्ष लगाना जरूरी है, लगे हुए वृक्षों की रक्षा करना उससे भी अधिक जरूरी है – – –।’’
महोत्सव जोर–शोर से चल रहा था। भाषण के बाद वक्ताओं को थकान मिटाने के लिए नाश्ते का पैकेट और हलक तर करने के लिए ”ठंडा” की बोतलें दी गईं।
इधर महोत्सव सम्पन्न हो रहा था और उधर पंडाल के बगल से गुजरने वाली मुख्य सड़क पर ट्रक गुजर रहे थे। उन पर लकडि़याँ लदी थीं। उन्हें देखने से लग रहा था कि कच्ची उम्र में ही पेड़ काट लिये गये हैं।
‘‘कच्ची उमिर के पेड़न को काट के जंगल बरबाद करने पर जब तक रोक नहीं लगेगी, ना पेड़ बढ़ेगा ना जंगल।’’ यह आवाज मूँगफली वाले की थी। वह कनात से घिरे पंडाल के बाहर सड़क किनारे खड़ा मूँगफली बेच रहा था। उसकी आवाज किसी ने नहीं सुनी, क्योंकि उसे वन महोत्सव के लिए वक्ता के रूप में नहीं आमंत्रित किया गया था।
वन महोत्सव संपन्न हो जाने की खुशहाली में सभी मशगूल थे। कार्यक्रम की समाप्ति पर धन्यवाद ज्ञापन हो रहा था।
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    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
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