जून-2017

देशविमर्श     Posted: January 2, 2015

कुछ स्त्रियों में विमर्श चल रहा था ।
एक ने कहा-‘‘हम युगों-युगों से दबाई जाती रही हैं, पर अब नहीं दबेंगी।’’
दूसरी ने कहा-‘‘हमें घर की चारदीवारी में कैद रखा गया।’’
तीसरी ने कहा-‘‘तुम घर की जीनत हो’ जैसे लुभावने शब्दों के जाल में हमारी
संवेदनाओं का शोषण किया जाता रहा।’’
चौथी ने कहा-‘‘यही नहीं…साहित्य में भी ‘नारी तुम केवल श्रद्धा हो’ जैसी
मकड़जाली, मनभावन व्याख्या के पीछे भी कहीं न कहीं हमारा शोषण निहित था।’’
पाँचवीं ने कहा-‘‘हाँ, हमें तो यहाँ तक कहा गया कि ‘अबला जीवन हाय तुम्हारी
यही कहानी, आँचल में है दूध और आँखों में पानी’-बताइए, क्या हम केवल ‘बेचारी’
और ‘बच्चा’ खिलाने वाली ही बनी रहेंगी?’’
इस पर पहली ने कहा-‘‘वह तो छोड़िए…अब पुरुषों ने यह जान लिया कि काम ऐसे नहीं चलेगा, तो उन्होंने ‘नारी-मुक्ति’ का नारा लगाना शुरू कर दिया । और फिर पूरे ‘तंत्र’ में हमारी स्वाधीनता को अपने ढंग से ‘कैश’ कराने लगे ।’’ उसने सामने के पोस्टर की ओर इशारा करते हुए कहा ।
पहली की तर्क-बुद्धि से पाँचवीं अभिभूत हो उठी। उसने पोस्टर को देखते हुए ,कहा-‘‘आप सच कह रही हैं दीदी, शोषण का तंत्र तो यहाँ तक हावी है कि आज जबकि ,स्त्रियाँ अपने अधिकार एवं अस्मिता के प्रति सचेत हो चुकी हैं, तब भी पुरुष उन्हें खुलेआम बेच रहा है। अब आप ही बताइए, शेविंग-ब्लेड का ऐड होता है और फोटो हमारी…परफ्यूम पुरुषों का और आकर्षक देह हमारी…आखिर क्यों ?’’ उसने कई उदाहरण दे डाले।
डॉ प्रकाश, जो पाँचवीं स्त्री के पति थे, उनकी बहस को सुन अचानक बोल उठे-‘‘माफ कीजिएगा, मैं एक क्षण के लिए आप लोगों की बातें काट रहा हूँ…। आप लोगों की बातें सुनकर यह निष्कर्ष निकल रहा है कि आज नारी के बिना पुरुष का किसी भी स्तर पर ‘सरवाइव’ कर पाना संभव ही नहीं है। हर स्तर पर पुरुष को उसका सहारा लेना पड़ रहा है। विज्ञापनों आदि में उसकी धमक यह सिद्ध करती है कि स्त्री ‘डॉमिनेट’ कर रही है…।’’ उन्होंने सहजता से समझाने के लहजे में कहा-‘‘भई, आप गलत सोचती हैं…आज के समय में तो आप सभी ‘लीड’ कर रही हैं!’’
फिर डॉ प्रकाश ने उबासी लेते हुए कहा-‘‘अरे रेखा, जरा चाय तो पिला दो यार…तुम्हारी चाय का तो जवाब ही नहीं ।’’
रेखा खुशी-खुशी पति के लिए चाय बनाने चली गई ।
विमर्श अब शांत था। स्त्रियाँ अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रही थीं।

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गतिविधियाँ

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    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

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