अक्तुबर-2017

देशशृंखला     Posted: October 1, 2015

मैं स्टेज पर बुलाना चाहूँगा नए डायमंड को, पहले इनकी साधारण परचून की दूकान थी लेकिन अब दस लाख रूपये महीने कमाते हैं । तालियाँ ….। स्टेज पर एक के बाद एक अलग अलग टाइटल के चेहरे बुलाए जा रहे थे और प्रति माह लाखों में उनकी आमदनी बतलाई जा रही थी। पंकज भी अपने एक दोस्त के कहने पर इस सेमिनार में आया हुआ था। बस आप तीन सदस्य बनाइये ,आगे वो तीन आगे और बनाएँगे । इस प्रकार शृंखला के बढ़ने के साथ आपकी आमदनी भी बढ़ती जायेगी। मात्र पाँच हज़ार का निवेश और अपार सम्भावनाएँ ।
पंकज के सपनों को भी पंख लग गए थे। आते ही खास दोस्तों और रिश्तेदारों की सूची बनाई। अब उसका पूरा समय किसी ना किसी के घर जाकर वीडियो की तरह सेमिनार में सुनी कहानी को दोहराने और सदस्य बनाने में गुजरता था। मेहनत करके उसने अपने खास दोस्त , बहन और सहकर्मी को सदस्य बना लिया। कुछ और रिश्तेदारों व परिचितों को उनका सदस्य बना दिया ; लेकिन बहुत प्रयास उपरान्त भी उसकी पत्नी का भाई विवेक सदस्य नहीं बना । पंकज को उससे नाराज़गी रहने लगी । भाई का उलाहना कई बार बहन को भी सुनना पड़ता।
प्रारम्भ में कुछ हज़ारों में आमदनी हुई लेकिन फिर शृंखला बंद हो गयी , परन्तु इधर स्वयं के पैतृक व्यवसाय पर ध्यान नहीं देने से लाखों का नुकसान हो गया। आजकल पंकज वापस दोस्तों और रिश्तेदारों के पास मदद के लिए घूमता है ;लेकिन सब उससे दूरी रखने में ही भलाई समझते हैं। अनमोल रिश्तों को वह पहले ही वह हजारों में भुना चुका था। वह बहुत हताशा और तनाव के दौर से गुजर रहा था। कुछ सूझ नही रहा था कि क्या करे।
अचानक एक दिन विवेक का फ़ोन आया “जीजाजी मेरे पास कुछ अतिरिक्त रकम है ्।आप चाहो तो कुछ समय के लिए अपने व्यवसाय को जीवित करने के लिए काम ले सकते हो ।”
पंकज आज खुश था॥अच्छा हुआ जो एक रिश्ता लालच की शृंखला से अछूता रह गया ।
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रोहित जयपुर।

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