अगस्त-2017

देशशैतानी     Posted: February 1, 2015

शैतानी
आज पिफर मैंने रोज़–रोज़ की शैतानियों से तंग आकर अपने सात वर्षीय बेटे की धुनाई कर दी थी। मैंने उसे चेतावनी देते हुए कहा था, ‘यदि आज तूने मुझसे बात भी की तो तेरी खैर नहीं।’ यही नहीं, गुस्से में आज मैंने उसके साथ खाना न खाने की प्रतिज्ञा भी कर डाली थी, जबकि मैं जानता था कि वह शाम का खाना मेरे साथ ही खाता है, भले ही उसे मेरा कितना ही इंतज़ार क्यों न करना पड़े। आज मैंने कार्यालय जाते समय रोज़ की तरह उसे प्यार भी नहीं किया था।
कार्यालय जाकर मैं अपने रोज़मर्रा के कामों में इस कदर उलझा रहा कि कब चपरासी मेरी टेबुल पर लंच रख कर चला गया और कब मैंने उसे खा लिया, इसका मुझे होश ही न रहा। कार्यालय के कुछ महत्त्वपूर्ण कामों के चलते शाम को घर पहुँचने में भी मुझे काफी देरी हो गई थी। घर पहुँचा तो पत्नी सोती हुई मिली। बेटे ने ही दरवाज़ा खोला। परन्तु मैं बगैर उससे कोई बात किए ड्राइंग रूम में सोफे पर पसर गया।
अचानक मेरी नज़र फर्श पर गिरी एक तस्वीर पर पड़ी, जो ड्राइंग रूम की दीवार पर काफी समय से टँगी हुई थी। शायद हवा से उखड़ कर वह गिर गई थी। मैं स्टूल पर चढ़कर उस तस्वीर को पुन: दीवार पर टाँगने की कोशिश करने लगा। तस्वीर टाँगने के पश्चात् जब मैं स्टूल से नीचे उतरने को झुका तो देखा, बेटा दोनों हाथों से ज़ोर से स्टूल थामे खड़ा है। उसे वहाँ देखकर मेरा पारा फिर गरम हो उठा। मैं उस पर बरसते हुए चिल्लाया, ‘क्यों रे, अब तू यहाँ स्टूल पकड़े क्या कर रहा है… क्या कोई नई शरारत सूझी है तुझे?’
इस पर डरते–डरते वह धीरे से बुदबुदाया, ‘पापा, शरारत नहीं… कहीं आप गिर पड़ते तो…?’
धीमी आवाज़ में कहे गए उसके उपर्युक्त शब्द मेरे कानों से ज़ोर से जा टकराए। मेरा गुस्सा पल भर में ही कापफूर हो गया था। मैंने स्टूल से नीचे उतरकर उसे अपनी बाहों में भर लिया था। मेरी बाहों में आते ही वह मेरे कान के पास अपना मुँह सटाकर धीरे से फुसफुसाया था, ‘पापा… चलो मेरे साथ…खाना खा लो…मुझे बहुत भूख लगी है…मैंने आपके इंतज़ार में सुबह से कुछ भी नहीं खाया है…।’
–916–बाबा फरीदपुरी, वेस्ट पटेल नगर, नई दिल्ली–110008
–0–

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    rdkamboj@gmail.com

    रचनाएँ भेजने के लिए पता-:-
    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-
    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine