अगस्त-2017

देशान्तरसिलसिला     Posted: June 1, 2015

सिलसिला
वर्षो पहले एक आदमी को अत्यधिक लोकप्रिय होने की वजह से सूली पर चढ़ा दिया गया था।
ताज्जुब की बात यह है कि कल मैं उससे तीन बार मिला
पहली बार वह एक वेश्या को जेल न ले जाने की बात पर एक पुलिसवाले से भिड़ा हुआ था।
दूसरी बार वह एक दलित व्यक्ति के जाम से जाम टकरा रहा था।
तीसरी बार वह धर्मस्थल में एक समाज सुधारक के साथ हाथापाई पर आमादा था।
(अनुवाद : सुकेश साहनी)

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    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
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