नवम्बर-2017

देशस्वर्ग के एजेन्ट     Posted: April 1, 2017

‘चलताऊ काम नहीं कराता पूरे विधि-विधान से सब कुछ कराऊँगा। ऐसे ही इक्कीस सौ रुपये नहीं माँग रहा हूँ। काम देखि लिया जाय, गारंटी….’
संगम में माँ के अस्थिफूल विसर्जन के लिए गये प्रेमशंकर को एक पंडा जी अपना भाव बता रहे थे और अन्य घेरे खड़े थे तथा अपना-अपना विज्ञापन अपनी तरह से कर रहे थे। मां का अचानक स्वर्गवास होने से प्रेमशंकर से कुछ बोलते नहीं बन पा रहा था। साथ में पत्नी और एक नजदीकी रिश्तेदार भी थे।
’पवित्र कर्म-काण्ड के बिना आत्मा मुक्ति नहीं पाती। शास्त्र कहता है कि वैतरणी में नाना मगरमच्छ, साँप, कछुआ…..। इनसे छुटकारा ? दान-दक्षिणा और कोई मार्ग नहीं। नरक में कोटि कल्पवास करेगी आत्मा।’
आध्यात्मिक, सामाजिक और वैधानिक कायदों में कसा इंसान इनसे निकल ही नहीं पाता। यहाँ जो हुआ, हुआ वहाँ तो बनी रहे। मिथ्याचार कूट-कूट कर रुधिर में इंजेक्ट कर दिये गए हैं। धर्म का भय सबसे भयानक !
काफी मोल-तोल के पश्चात् एक नाव वाला जाने को तैयार हुआ।
’अपने पंडा जी हैं जिनका ऑफर सिस्टम चलता है। एक तगड़ी पार्टी सुबह पाँच हजार गिनकर गई है। पूरे घण्टा भर मंत्र जाप चला था। भाई जैसी आत्मा वैसा विधान। ………….पातकी था। माता जी तो देवी …….’
’ई गंगा…ई जमुना…… सरस्वती का दर्शन भाव से करें। माता जी का ध्यान करते हुए उनके भोजन, वस्त्र, नित्य नैमत्तिक आवश्यकताओं का संकल्प …….। अस्थि फूल यहाँ डाल दें।’
सजल नेत्रों से प्रेम और पत्नी ने माँ को प्रणाम करते क्रिया की।
’बड़ा विधिवत् कराए हैं महाराज जी भाई वाह।’
केवट प्रायोजित प्रशंसा किए जा रहा था।
’जजमान इनको ग्यारह सौ……..’
क्यों भाई ? तुम तो कह रहे थे कि खाली नाव का देना है। कर्म-काण्ड के लिए जो खुशी हो। कुछ ऑफर-वाफर बता रहे थे न तुम।’
’हम कोई ऐरा-गैरा नहीं हैं। हम से बचकर जाइएगा। यह देखिए लाइसेंस है हमारे पास…….पंडा हूँ। बात करते हैं। जाइए माथा मत खराब करिए कुछ मत दीजिए।……घाट तक पहुँचिए ! नावें डूबी हैं…….मझधार में। सिंपल समझ रखा है हम लोग को………। खाली डंड-कमण्डल करने वाले बाप-दादा चले गए..
प्रेम पत्नी से कह रहे थे…’ये लोग अम्मा को बैकुण्ठ दिलाएँगे ??’
-0-

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    rdkamboj@gmail.com

    रचनाएँ भेजने के लिए पता-:-
    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-
    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine