नवम्बर-2017

देशहार!     Posted: May 1, 2015

पत्नी के गले में बेशकीमती स्वर्ण–हार देख, उनका ध्यान बरबस खिंच गया था। होंठ खुले के खुले रह गये थे। जिह्वा तालु से चिपक गई थी।
अपने अफसर पति की मनोदशा देख, पत्नी ने खुद बताया – अजी दीपावली थी न, उपहारों में आ गया है।
सच्चे मोतियों का हार और उपहार ?
आप दफ्तर निकले थे कि नेतानुमा एक शख्स आया। उसने अपने सूटकेस से उपहार निकाला और मुझे पकड़ा दिया।
पत्नी का हाथ हार पर था और आँखें पति के उद्विग्न चेहरे पर टिकी थीं।
लेकिन…………?
अजी एक कागज भी निकला था, हार के साथ। मैंने तो उसे खोला तक नहीं। आप ही पढ़ लें। उसने अलमारी से लिफाफा निकाला और पति की ओर बढ़ा दिया था।
कागज पढ़ते आला अफसर चिंता, क्षोम और लोभ की त्रिवेणी में उतरते चले गए थे।
कागज में उस हिस्ट्रीशीटर को बचाने की पेशकश थी, जिसने एक अबोध बालिका के साथ बलात्कार कर उसका गला दबा दिया था।
पत्नी अपने पति की ज्वार–भाटा होती भाव -भंगिमा देखकर डर -सी गई।
पच्चीस बरस की नौकरी हो गई इनकी, रिश्वत को सरकफाँसी मानते हैं।
सहमी आवाज में वह कहने लगी – अजी नियाव–अनिवाय (न्याय–अन्याय) की बात हो, तो निकाल पटकती हूँ। आएगा, छाती में मार दूँगी, उसके।
कागज जेब में रखते हुए आला अफसर ने होंठों पर जीभ फेरी और थूक निगल गये थे।
-0-
रत्नकुमार सांभरिया,भाड़ावास हाउस,.137 महेश नगर,जयपुर – 302015
मोबा: 09460474465, ई मेल-sambhriark@gmail.com>

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    rdkamboj@gmail.com

    रचनाएँ भेजने के लिए पता-:-
    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-
    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine