जून-2017

देशान्तरज़िन्दगी     Posted: February 1, 2015

मेरा घर मुझसे कहता है, ‘‘मुझे मत छोड़ो क्योंकि तुम्हारा अतीत मुझसे जुड़ा है।’’
और सड़क मुझसे कहती है, ‘‘आओ मेरे साथ चलते चलो क्योंकि मैं तुम्हारा भविष्य हूँ।’’
मैं घर और सड़क दोनों से कहता हूँ, ‘‘न कोई मेरा अतीत है और न कोई भविष्य। अगर मैं यहाँ रुकता हूँ तो मेरे रुकने में जाना है, अगर मैं जाता हूँ तो मेरे जाने में रुकना निहित है। केवल जन्म और मृत्यु ही सभी चीजों को बदलते हैं।’’
-0- ( अनुवाद: सुकेश साहनी)

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

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    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    rdkamboj@gmail.com

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    -सम्पादक द्वय

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