जून-2017

चर्चा में25वां अंतर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन सम्पन्न     Posted: November 1, 2016

मिन्नी’ त्रैमासिक द्वारा आल इंडिया पिंगलवाड़ा चैरिटेबल सोसाइटी के सहयोग से 23 अक्तूबर 2016 (रविवार) को पिंगलवाड़ा, मानावाला (अमृतसर) में आयोजित 25वें अंतर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब से भारी संख्या में लघुकथा लेखक इक्ट्ठा हुए। दोपहर दो बजे प्रारंभ हुआ दो सत्रों का यह सम्मेलन रात्रि 9 बजे के आसपास सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। हमेशा की भांति पहला सत्र सम्मान समारोह और पुस्तक विमोचन के रूप में रहा जिसमें मिन्नी त्रैमासिक का 113वां अंक, पछाण ते पड़चोल(दूसरा भाग-संपादक : दीप्ति, अग्रवाल, नूर व खेमकरनी), आथण वेला(श्याम सुन्दर अग्रवाल का तीसरा लघुकथा संग्रह), कैक्टस ते तितलियां (बलराम अग्रवाल का पंजाबी में लघुकथा संग्रह, अनुवादक: श्याम सुन्दर अग्रवाल), मेरियां प्रतिनिधि मिन्नी कहानियां (श्याम सुन्दर दीप्ति का नया लघुकथा संग्रह), ठीक किहा तुसीं (गुरसेवक सिंह रोड़की का लघुकथा संग्रह), पंजवा थम्म(संपादक: जगदीश राय कुलरियां), गल्पी विधा लघुकथा: सिद्धांत ते विचार (डॉ. कुलदीप सिंह दीप), तारा मंडल (अशोक भाटिया का पंजाबी में लघुकथा संग्रह, अनुवादक : जगदीश राय कुलरियां), ‘पथ का चुनाव’ (कांता राय का लघुकथा संग्रह) तथा ‘बालमन की लघुकथाएं(डॉ. श्याम
सुन्दर दीप्ति) आदि पुस्तकों का विमोचन हुआ।

001इस बार ‘लघुकथा किरण 2016’ सम्मान से हिन्दी में ग्वालियर की लेखिका सीमा जैन को और पंजाबी में श्री कुलविंदर कौशल को सम्मानित किया गया, वहीं बनीखेत (हिमाचल प्रदेश) से पधारीं श्रीमती आशा ठाकुर को ‘ललिता अग्रवाल स्मृति सम्मान-2016’ से नवाजा गया। ये सम्मान डॉ. इंद्रजीत कौर, प्रधान, ऑल इंडिया पिंगलवाड़ा चेरिटेबल सोसायटी के हाथों प्रदान किये गए। इसके साथ ही, हरियाणा लेखिका मंच, सिरसा की ओर से श्रीमती शील कौशिक के हाथों ‘श्री बलदेव कौशिक स्मृति सम्मान 2016’ हिन्दी के जाने माने लेखक डॉ. अशोक भाटिया को प्रदान किया गया। इस अवसर पर ‘मिनी कहाणी लेखक मंच’, अमृतसर द्वारा पंजाबी में आयोजित की गई 26वीं  लघुकथा प्रतियोगिता के विजेताओं – मंगत कुलजिंद(मंडी लघुकथा), कुलविंदर कौशल (बुरकी लघुकथा) और मनमोहन सिंह बासरको( तीजा नाग लघुकथा) को क्रमश: पहला, दूसरा और तीसरा पुरस्कार हरभजन खेमकरनी के हाथों प्रदान किया गया। डॉ. इन्द्रजीत कौर, प्रधान, आल इंडिया पिंगलवाड़ा, मानावाला ब्रांच, अमृतसर ने लेखकों को संबोधित होते हुए कहा कि सामाजिक बुराइयों को दूर करने में साहित्यकारों को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। लघुकथा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये छोटी-छोटी कथायें बहुत बड़ी बात कह जाती हैं। डॉ. अनूप सिंह, डॉ. कुलवंत सिंह ओजला, डॉ. सरदूल सिंह ओजला, डॉ. कुलदीप सिंह दीप ने लघुकथा में आने वाली चुनौतियों, वर्तमान समय और समाज में लेखिकों की भूमिका, लघु रचनाओं और लघुकथाओं के बीच के फर्क पर खुलकर बात की।

4इस सम्मेलन का ‘जुगनुओं के अंग-संग’ नाम का दूसरा सत्र बहुत खास और अहम हुआ करता है जो लघुकथा पाठ और उस पर खुली चर्चा पर आधारित होता है। पहले यह सत्र देर रात तक चला करता था। कई बार तो सुबह के चार बज जाते थे। पर अब इसे शाम को जल्दी प्रारंभ करके रात्रि नौ बजे तक समाप्त कर देने का प्रयास किया जाता है। इस बार हिन्दी और पंजाबी के लगभग पचास से भी ऊपर लेखकों ने अपनी-अपनी लघुकथा का पाठ किया। लघुकथा पाठ में सुरजीत देवल(परम मनुख), रणजीत आज़ाद कांझला(चौक में खड़ा आदमी), गुरमीत रामपुरी(माफ़ करना), अमरजीत कौर (सूझ), जगतार भाईरूपा (सिख घुग्गियां), मंगत कुलजिंदर (मर्द), दरशन सिंह बरेटा(ज़िन्दगी दी डाट), महिंदरपाल मिंदा (बेबसी), कुलविंदर कंग(सिवियां दी अग्ग), परगट सिंह जंबर(कमज़ोर परमात्मा), विवेक (उदासी), सुखचैन थांदेवाला (हूंझा), डॉ. नीरज शर्मा (सफ़र), कान्ता राय(लक्ष्य की ओर), राधेश्याम भारतीय(कीचड़ में कमल), रंजीत टाडा(गाय का प्रस्ताव), मधुदीप(माया मोह), अशोक दर्द(वसंत का आना), देवराज संजू (मासूमियत की मौत), कुलविंदर कौशल(सरापी ज़िन्दगी), इंजी. डी.एम. सिंह(समर्थ बाऊजी), डॉ. उपमा शर्मा(आकांक्षा), नीता सैनी (देशी गुलाब), बलविंदर सिंह मकरौना(चोगा), सत्यजीत राय(प्रतिद्वन्दता), पवन जैन(चैम्पियन), हरजीत सिंह (बूढ़ी माँ), देविंदर आज़ाद (गिरगिट), अमृतमनन(शंका), दुलीचंद कालीरमन(दलदल), शोभा रस्तोगी(कैनवस), सुरजीत सिंह जीत(पुआड़े दी जड़), मधु जैन(अनौखी पहल), विभा रश्मि(प्रयास), सीमा जैन (डर),  डॉ. कर्मजीत नडाला(खेड), हरप्रीत सिंह राणा(इन्तज़ार), बूटा खान सुखी(अणसुणी चीक), प्रो. बलदेव सिंह वालिया(अनुशासन), डॉ. शील कौशिक (ऐसे शिष्य), मेज़र शक्तिराज कौशिक(प्रतिबंध) आदि लेखकों ने भाग लिया। पढ़ी गई लघुकथाओं पर विद्वान आलोचकों द्वारा सारगर्भित दो टूक निष्पक्ष चर्चा की गई। चर्चाकारों  में डॉ. पवन हरचंदपुरी, डॉ. अनूप सिंह और डॉ. कुलदीप ‘दीप’ (पंजाबी की ओर से), डॉ. अशोक भाटिया व डॉ. बलराम अग्रवाल (हिन्दी) की ओर से आलोचक तय किये गए थे। सबसे अधिक उल्लेखनीय बात यह रही कि अधिकतर लघुकथाएँ  बहुत जानदार और उत्कृष्ट थीं और कई लेखकों का लघुकथा वाचन उत्तम दर्जे का था। दूसरी तरफ आलोचना भी बहुत गंभीर और सधी हुई थी, कहीं कोई लिहाज वाली बात देखने को नहीं मिली। आलोचना करते समय रचनाकार को नहीं, उसकी रचना को सामने रखा गया और उस पर खुलकर बात की गई !

002इस सम्मेलन में दिल्ली से मधुदीप व श्रीमती मधुदीप, बलराम अग्रवाल, सुभाष नीरव, शोभा रस्तोगी, नीता सैनी, डॉ. उपमा, अमृत मनन, राजस्थान से नीता सैनी व उनकी बेटी मनीषा, मध्य प्रदेश से सीमा जैन, तिलक जैन, मधु जैन, पवन जैन, कान्ता राय, सत्यजीत राय, हरियाणा से अशोक भाटिया, राम कुमार आत्रेय, सत्य प्रकाश भारद्वाज, शील कौशिक, मेजर शक्तिराज कौशिक, रूपदेव गुण, उत्तर प्रदेश से डॉ. नीरज शर्मा, डॉ. सुधांशु शर्मा, हिमाचल प्रदेश से अशोक दर्द, श्रीमती आशा शर्मा, देवराज संजू व उनकी पत्नी, पंजाब से श्याम सुंदर दीप्ति, श्रीमती ऊषा दीप्ति, श्याम सुंदर अग्रवाल, हरभजन खेमकरनी, डॉ. अनूप सिंह, डॉ. कुलदीप सिंह दीप, पवन हरचंदपुरी, हरप्रीत राणा, रंजीत टांडा, कुलविंदर कौशल, दर्शन बरेटा, बूटा खान, महिंदर पाल मिंडा, कुलविंदर कांग, सुरजीत देवल, विवक, हरजीत सिंह, वरिंदर आज़ाद, रणजीत सिंह कांझला, डॉ. कर्मजीत नडाला आदि ने अनेक अन्य लेखकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज़ कर इसे सफल बनाने में अपनी भूमिका अदा की।

इस सफल और सार्थक आयोजन के लिए डॉ. श्याम सुन्दर अग्रवाल, डॉ. दीप्ति, खेमकरनी जी और समस्त ‘मिन्नी’ टीम बधाई की पात्र हैं।

-0-प्रस्तुति-सुभाष नीरव ,subhashneerav@gmail.com; Mob : 09810534373

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    rdkamboj@gmail.com

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    laghukatha89@gmail.com

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    -सम्पादक द्वय

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