मई-2018

देशान्तर1-उलाहना,2-आराम की ज़रूरत     Posted: January 1, 2018

1-उलाहना 

“देखो यार, तुमने ब्लैक- मार्केट के दाम भी लिए और ऐसा रद्दी पेट्रोल दिया कि एक दुकान भी न जली।”

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2-आराम की ज़रूरत

“मरा नहीं- देखो, अभी जान बाक़ी है।”

“रहने दो यार- मैं थक गया हूँ।”

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गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


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    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    chandanman2011@gmail.com

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    -सम्पादक द्वय

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