जुलाई -2018

देशटोका-टाकी     Posted: July 1, 2016

पिता-पुत्र से-”बेटे, अब तो मैंने तुम्हें कुछ कहना सुनना, राय देना अथवा टोकना बिल्कुल बंद कर दिया है, जबसे तुमने मुझसे कहा था कि घर की हर एक बात में मेरी टोका-टाकी से तुम्हारी खुशियों में खलल पड़ता है। इस बात को चार महीने बीत गए पर मैं देख रहा हूँ कि मेरे चुप रहने के बावजूद मैंने तुम्हें कभी खुश महसूस नहीं किया। क्या बात है बेटे, कोई परेशानी हो तो मुझे बताओ, शायद उसका कोई हल मैं निकाल पाऊँ।”

”पिताजी, मुझे कोई और परेशानी नहीं है, परेशान हूँ तो केवल इस बात से कि अब हमें आपकी टोका-टाकी सुनने को नहीं मिल रही है। आपकी यह चुप्पी हमें कष्ट देने लगी है। अब आपका यह पूर्ण मौन हमारी खुशियों को खाने लगा है।पिताजी, हमारी समझ में आ गया है कि आपका टोकना हमारे लिए कितना महत्त्व रखता है। अब हम यह भी जान गए हैं कि आपके टोकने के पीछे कोई दुर्भावना नहीं ,बल्कि हमारा ही हितचिंतन रहता है। कृपा कके हमें क्षमा कर दीजिए और अपने अनुभवजन्य विचारों से हमारा मार्गदर्शन करते रहें”

इस प्रकार उल्लसित मन से पिता-पुत्र का मौन टूट गया।

अब पिताजी भी टोका-टाकी में संयम बरतने लगे।

-0-

 

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    chandanman2011@gmail.com

    रचनाएँ भेजने के लिए पता-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine