नवम्बर -2018

देशबदलते संदर्भ     Posted: January 1, 2016

स्त्री–तुम कौन?
पुरुष–मै…..मैं हूँ तुम?
स्त्री–जैसे तुम, वैसे ही मैं भी सिर्फ़ ‘मै’ हूँ।
पुरुष–तुम बेहद खूबसूरत हो…..।
स्त्री–तुम भी तो,…..कितने अच्छे हो,बहुत पहचाने से लगते हो, अपनों से!
पुरुष–अच्छा…..।‘तुम’ और ””””मैं””””…हम’ हो सकते हैं? कुछ झिझकता हुआ स्वर ।
मौन स्वीकृति का आदान प्रदान।
स्त्री–‘मैं’ और ‘तुम’ अब ””””हम”””” कहलाने लगेंगे…।
तिनकों से घोंसला सँवारनेका उपक्रम।
पुरुष -सच! क्या यह हमारी दुनिया है, विश्वास नहीं होता न !
स्त्री–हाँ! हाँ ये तो हमारा ही घर है…। यहाँ हमारे ग़म और खुशियाँ रहेंगी।
समय पंख लगा उड़ चला।
पुरुष- हमारा प्यार……..? तुम कुछ लापरवाह…
स्त्री–मैं, नौकरी करूँगी!
पुरुष–कर लो, तुम्हारा पर्सनल मैटर !
स्वतन्त्र होने की छटपटाहट!
स्त्री–यह लो मेरा पहला वेतन…।
पुरुष–तुम्हारा? यानी तुम्हारा, केवल तु….।
शब्दों के आघात। छेदने–भेदने
की होड़! अहं–तुष्टि का भ्रम।
किनारा कटने लगा।
पुरुष–चलो तुम्हारी तरक्की हो गयी,अच्छा हुआ, बॉस को मस्का लगाना मुझे भी सिखा दोेगी?
स्त्री– मकान का किराया तुम्हारे हिस्से!
पुरुष -नहीं आधा–आधा ।
स्त्री– आज से तुम्हारी सिगरेटस् बन्द,मँहगा शॅगल है।
पुरुष–तुम्हारी फि़जूल ख़र्ची, मेकअप बन्द’
पार्लर मँहगा है, कोई सस्ता ढूँढ़ लो।
एल. सी. डी .टी.वी. को सारे दिन मत चलाया…।
ये मेरा….वो तुम्हारा।
मेरा….तुम्हारा…..मैं..तुम, तुम मैं, मैं….मैं, तुम….तुम…..।
तू–तू , मैं –मैं।
अहम् की आँधी
-0-

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    chandanman2011@gmail.com

    रचनाएँ भेजने के लिए पता-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine