अक्तूबर -2018

संचयनलघुकथाएँ     Posted: January 1, 2016

अँगूठा
बचपन में वह अँगूठा चूसता था और आज अँगूठा उसे चूस रहा है। कारण, मुखिया के विरोध में एक उसी ने अँगूठे का ठेपा दिया था।
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2-वोट

आदतन मैं सात बजे उठकर बाहर निकला ,तो सन्नाटे में आ गया। भोला चाचा उर्फ़ गाँधी जी सामने नज़र आ गए।
‘‘जय हिन्द, चाचा,’’ मैंने कहा, चाचा मुस्कराते हुए ‘जयहिन्द’ बोले।
मैंने पूछा, ‘‘इतने तड़के चाचा….।’’
‘‘आज चुनाव है। समझ में नहीं आता, तुम नौजवानों को क्या हो गया है। रात को सुनते हो और सवेरे भूल जाते हो।’’इतना कहकर चाचा आगे बढ़ गए। कुछ समय बाद चाचा फिर नज़र आए।
मैंने पूछा,‘‘क्या बात है चाचा! आप उदास….।’’
‘‘बेटा! मेरे नम्बर आने पर बैलट देने वाला हाकिम बोला, ‘‘इस उम्र में भी आप बोगस वोट देने आए हैं? सीधे और चुपचाप घर जाइए और भगवान का नाम लीजिए….कहीं कोई सुन लेगा ,तो बेकार में पुलिस का चक्कर हो जाएगा। आपके नाम पर बहुत पहले ही वोट पड़ चुका है।’’
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3-दर्पण

मीनार की ईंट ने नींव की ईंट से कहा, ‘‘देखो! एक मैं हूँ कि लोगबाग देखकर खुश होते हैं, और एक तू है जिसे….।’’
‘‘हाँ! तुम ठीक कहती हो, पर अपने की कभी टटोला है तुमने कि तुम किसके कंधे पर खड़ी हो?’’
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4-न्याय

भोला पर गो–हत्या का ठेपा लगा दिया गाँव के पंडितजी ने उसका समाज में हुक्का–पानी बन्द कर दिया गया। वह सबके सामने बोला, ‘‘मैंने जानकर नहीं मारा मालिक! मेरी फसल को खा रही थी। मैंने एक हाँक दी, वह भागने लगी पर मेड़ से टकरा गई और ढेर हो गई। इसमें मेरा क्या कसूर?’’ पर धर्म के ठेकेदारों द्वारा कोई अन्य फैसला नहीं हुआ। हारकर अपने घर से बाहर होना पड़ा और भिक्षाटन करके तीर्थ करना पड़ा। गो–मूत्र एवं गोबर पीने के बाद ब्राण एवं अपनी बिरादरी में ‘भात’ देना पड़ा ,तब जाकर उसके सर से गो–हत्या का पाप हटा। लगभग उसके घर का सब कुछ सेठ के यहाँ चला गया और उसके ऊपर कर्ज भी हो गया।
अगले महीने मुखियाजी के भतीजे ने अपने खेत में गाय को चरता देखकर गोली मार दी। गाय वहीं शान्त हो गई। मन्दिर में सभी लोग जमा हुए। भतीजे द्वारा कहा गया, ‘‘मैंने बैल समझकर गोली चलाई थी। अगर गाय होती तो मैं कतई नहीं मारता। ‘‘पंडित जी द्वारा कहा गया, ‘‘दोष उस लड़के का नहीं है। दोष है बन्दूक का। इसलिए बन्दूक को गंगाजल से धो दिया जाए और उसको एक शाम उपवास करना होगा।’’ इतना कहकर सभी अपन–अपने घर चले गए।
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5-पदचिह्न

हाथ में बोतल लिये लड़खड़ाते कदमों से र में प्रवेश करते हुए जवान बेटे को देखकर वह गरजा, ‘‘हरामी! फिर शराब…..।’’
‘‘यह सब बोतल ढुलवाने के पहले सोचना था।’’
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6-प्रोडक्शन

‘‘दस हजार क्यों….?’’
‘सर! प्रोडक्शन यूनिट घाटे में चल रही है।’’
‘‘क्यो? देखभाल नहीं की?’’
‘‘ की थी, सर! कुछ लोग….।’’
‘‘बोलो,रुक क्यों गए?’’
‘‘दरअसल बात यह है, सर!… कुछ लोग अब रिटायरमेण्ट के योग्य हो गए हैं।’’
‘‘कौन–कौन ?’’
‘‘डकैती, अपहरण एवं चकला, सर।’’ मुंशी ने फाइल देखकर कहा।
‘‘राहजनी,शराब, जुआ, चोरी एवं जेबकतरा विभाग को और सक्रिय करो तथा तीनों विभागों में आज दूसरे को चार्ज दे दो ताकि प्रोडक्शसन बरकरार रहे, समझे।’’ इतना कहकर दारोगा चेयर से उठकर थाने से बाहर हो गया।
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गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


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    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
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