नवम्बर -2018

देशबलदेव बाबा की बातें     Posted: May 1, 2016

 

बलदेव बाबा को गाँव-शहर में पलने वाली जिन्दगियों का बड़ा गहरा अनुभव है । वह मेरे जैसे किसी भी युवा को खाली देखकर पास बुलाते और कोई-न-कोई वाकया चलते-फिरते या बैठ कर सुनाने लगते। अधिकतर हमलोग उनकी बाते कम ही सुना करते हैं इस कारण वह कुछ बाते संक्षेप में कहने के आदी  हैं । आज वह मुझे बुलाकर शहर के अनपढ़ो के बारे में बताने लगे और बात उन्होंने एक झाबुआ कुम्हार से शुरू कर दी-

झबुआ कुम्हार ने मिट्टी का काम अब न चलने की बजह से घर के सामने पड़ी खाली जमीन परसुराम पंडित के हाँथ बेच दी । कभी उस जमीन पर लम्बी गर्दन वाली गेरुइ सुराहियाँ, छोटी और मोटी गर्दन के घड़े, कुछ कच्ची मिट्टी जैसे ही मटमैले कुम्भ और पके हुए लाल सुर्ख़ प्याले आदि मिट्टी के बर्तन तरतीब में रखे रहते थे । झाबुआ भी अपने बाप के साथ कोहनी तक सने हाँथों से चाक पर बर्तन भाँता (बर्तन को आकार देने क्रिया) रहता । बहुत बचके निकलना पड़ता था वहाँ से; कहीं बर्तन विकृत न हो जाय ! अब वह जगह खाली हो गयी थी सो उसने बेंच दी। बचे हुए पैसों से उसने कुछ बकरियाँ खरीद लीं ।  निकलते-पैठते बकरियाँ कभी-कभी उस जगह पर मल-मूत्र कर देती थीं जिसे अब परसुराम पंडित खरीद चुके थे। पंडित जी ने झाबुआ को प्यार से समझाया “देखो बकरी पालना नीच जातियों के काम हैं । तुम इसमें कहाँ पड़े हो ! तुमे पता है जिस स्थान पर बकरी एक बार मूत्र त्याग दे वह स्थान गऊ माता के सौ बार मूत्र विसर्जन से पवित्र होता है। तुम इन नीच जातियों के जानवर पाल के बदनाम न हो । ”

झाबुआ समझ गया लेकिन झाबुआ की बहू नहीं समझी। बकरियों का इठलाना चलता रहा और पंडित जी का धैर्य चरम पर पहुच गया । एक दिन झाबुआ को बुलाया अबकी वह धमकी भरे स्वर में समझाने लगे। बोले कि “तुमने पूरी जमीन के पैसे लिये हैं… तुझे निकलने का रास्ता हमने खुशी से दिया हुआ है। सारी ज़मीन पर बौन्ड्री बना दी तो कहाँ से निकले गा। कितनी बार कहा ये तेरी छेरिया-बकरियाँ वहाँ न उधम मचाएँ। तेरे कान पर जूँ नहीं रेंगती ।” उस दिन पंडित जी ने बकरियाँ न निकालने की आखिरी हिदायत बोल दी ।  झाबुआ क्या करता ! सोचने लगा जमीन दी थी तब रास्ता न देने की कोई बात ही नहीं थी, वह तो सभी का है । अब यह नया विवाद बन गया !  घर आकर उसने बहु को बहुत समझाया-बुझाया और अपनी ऊँच जाति का भी दंभ भर कर बकरियाँ बेचने की घर से इजाज़त ले ली । और अपने आप यहाँ शहर में रिक्शा चलाता है । अनपढ़ है लेकिन शहर के सारे रोड-रास्ते जनता है यह झबुआ कुम्हार ।

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