नवम्बर -2018

देशतोहरा खातिर     Posted: June 1, 2016

 

पीले बल्ब के भक्कभकाते ही झुग्गी का अँधेरा झट से झुग्गी में बिछी चारपाई के नीचे जा छिपा। चारपाई पर लेटा रामबिरिछ आँखें मलता हुआ उठ बैठा। उसके सामने गहरे नीले रंग की स्कर्ट और हल्के नीले रंग की स्लीवलैस टाप पहने एक औरत खड़ी थी। उसने आँखें झपकाकर देखा। औरत और कोई नहीं उसकी अपनी बीवी थी – हट तोहार मइया की…. ई सब का बा ?

हँसते हुए अँजुरी ने कहा – रविवार को फुटपाथिया बाजार लागल रहे। हम काम से लौटत रही त उहाँ ई बिकात रहे! सौ रुपया में…. थोड़ा पुराना रहे! अइसन नया त ढेर महँगा में मिली! बहुत दिन से हमरा ख्वाहिश रही! एही से हम खरीद ली है!

रामबिरिछ का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया। शर्म नईखे लागत? तू पहनबे? तू हीरोईन बनबे? भले घर की औरतिया अइसन कपड़ा पहनत हय?

‘‘जो पहन के घुमत है ,वो भी तो कबनो भले घर की होत है? तु ही त रोज–रोज हाय कैटरीना हाय कैटरीना करत हो? हम कहा कि हमही आपको कैटरीना जइसन हीरोइनी बन के दिखा दूँ! हम सोचे तोहरा के खुश कर दूँ! तोहरा खातिर ही तो….. अपनी कमाई के पैसों की लाई हूँ?

भड़क गया रामबिरीछ – साली जुबान लड़ाती है? बहुत पईसे कमाने वाली हो गई हो? पंख लग गए हैं तुझे शहर आ के? जब तुझे शहर ला रहा था माँ ने कहा था, आपन पहनन ओढ़न मत भूलिह – और तू……?

–ई तो मैं तोहरा खातिर…..?

–जब तू गाँव से आई थी। तूने कहा – फैक्टरी में साड़ी पहन के काम नहीं हो पाता। काम करना है ,तो मुझे सूट सलवार पहनना पड़ेगा। मैंने कहा – चलो कोई बात नहीं…. शरीर तो ढका रहता है। पर अब तू तो हद कर दी?

तोहार ई पंख–वंख काट देब! ई सब ना चली!

लेकिन मैं त…. तोहरा खातिर…..

साली जबान लड़ाती है…. तोहरी टाँगें तोड़ देब….

बात बढ़ गई थप्पड़ लात घूँसे जो बन पड़ा रामबिरिछ चलाने लगा। पत्नी के पिटने के बाद उसने झुग्गी की बत्ती बुझा दी। अँधेरा चारपाई के नीचे से निकलकर पूरी झुग्गी में फैल गया।

अंजुरी चारपाई के पास नीचे जमीन पर बैठकर रोने लगी।

चारपाई पर लेटे–लेटे कुछ देर बाद रामबिरिछ को लगा यह क्या किया उसने…..? कोई दूसरी औरत ऐसा कपड़ा पहने तो वाह–वाह और अपनी बीवी पहने तो बेशर्म – बेगैरत…..? वैसे भी ये पहनकर कहीं बाहर तो गई नहीं….? सिर्फ़ मेरे लिए तो पहने हैं। वो भी रात में! दुनिया देख लेगी तो क्या कहेगी? हम जैसे मामूली लोग अपनी कोई छोटी सी ख्वाहिश भी पूरी नहीं कर सकते?

अँधेरे के बावजूद उसने देखा उसकी बीवी उठकर कपड़े बदलने लगी है।

एकाएक वह उठा और उसे रोकते हुए बोला – हाय मेरी कैटरीना …. डरेस लाई है, तो मुझे भी देख लने दे। एकाएक उसने बत्ती जला दी। झुग्गी में भरा हुआ अँधेरा फिर से चारपाई के नीचे जा छिपा। अपनी तरफ खींचते हुए रामबिरिछ ने कहा – देख ई कपड़ा पहन के बाहर मत जईहैं! सिर्फ़ रात के पहन के सिर्फ़ हमरा के कैटरीना बन के दिखइयो!

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