नवम्बर -2018

देशदंड     Posted: June 1, 2016

बहुत आत्म विश्वास के साथ धीरज ने अपना चेहरा मोबाइल में देखा।नोटों से भरे सूटकेस को हल्के से थपथपाया।एक और तथाकथित ईमानदार अधिकारी के ईमान को खरीदने के संकल्प के साथ उसके होंठों पर एक स्मित खेल गई।

“सर! शहर में एक नई अधिकारी आई है।उसने हमारेहोटल की अवैध रूप से बनी चार मंज़िलों को गिरा देने का आदेश जारी कर दिया है।”सुबह ही उसके मैनेजर ने उसे सूचित किया था।

“इतना घबरा क्यों रहे हो वर्मा? कुछ पैसों की ज़रूरत होगी बेचारी को।” उसने मामले को बहुत हल्के में लेते हुए कहा।

“नहीं सर, सुना है वह बहुत ईमानदार और कड़क है।किसी की नहीं सुनती।”

“यहाँहर चीज़ बिकाऊ है वर्मा,बस कीमत सही लगनी चाहिए।” उसने घमण्ड से कहा और उससे मिलने चल दिया।

पी.ए.के इशारा करने पर बहुत ही आत्मविश्वास के साथ वह अधिकारी के कक्ष में दाखिल हो गया। अधिकारी का तेज़ाब से विकृत चेहरा देखकर उसका दिल दहल गया।इस विकृत चेहरे को वह कैसे भूल सकता था? प्रेम अस्वीकृतिका ””””दंड””””ये विकृत चेहरा उसी की ही तो देन था।

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