अक्तूबर -2018

देशडांस     Posted: November 1, 2016

ट्रेन ..अपनी पूरी गति मे थी. रिज़र्वेशन बोगी में एक अकेली युवती अपने बर्थ पर लेटी थी .
उसके सामने की बर्थ पर एक परिवार भी सफ़र कर रहा था ….हसबैंड , वाइफ और एक 5 साल की तुतलाकर बोलने वाली… नटखट- सी बच्ची .ट्रेन लम्बी दूरी वाली थी . सफ़र की बोरियत को मिटाने के लिए …पति ने मोबाइल पर हाई वॉल्यूम गाना बजाया –
“तू लेया दे मेनू गोल्डन झुमके
मैं कन्ना विच पावाँ चुम चुम के ….
….मन जा वे मैनु शॉपिंग करा दे
मन जा वे रोमाँटिक पिक्चर दिखा दे
ओह बेबी मेरी चिट्टियाँ कलाइयां वे”
गाने की धुन सुन कर बच्ची तालियाँ बजाने लगी. फिर माँ के कहने पर डांस करने लगी । ट्रेन एक
छोटे स्टेशन पर किसी कारण वश देर तक रुकी रही …. बच्ची ने फिर से डांस शुरू किया …”
.” माँ उसे स्टेप्स समझाती …..वह बार- बार भूल जाती …अन्य यात्रियों को भी बड़ा मज़ा आ रहा था.
सामने बैठी अकेली युवती जो बेहद ही उदास थी । उस बच्ची का डांस देख कर खुश हो गई । उसने उस बच्ची को बड़े सी सिंपल तरीके से गाने के स्टेप्स बताए । वह बच्ची तुरंत सीख गयी। वह बिल्कुल …फिल्मके गाने की तरह थिरकने लगी।
बच्ची की माँ खुश होकर बोली , “ लगता है आप डांस टीचर हो।” वह मुस्कुरा कर रह गयी।
अगले वीक इसके स्कूल में अन्नुअल प्रोगाम हैं …इसे इसी गाने पर डांस करना हैं। थोड़ा और इसे सीखा वह युवती उसे गाने के पूरे स्टेप्स सिखाने लगी ।
“वाह ! टीचर और स्टूडेंट में भरपूर टॅलेंट हैं “ – किसी ने कहा । माहौल ठहाकों से भर गया।
दोपहर के समय …जब पति उपर के बर्थ पर सो गया । वह औरत उस युवती से बतियाने लगी।
“ मुंबई मे जॉब करती हो ?”
“ हाँ , ……..बार डॅन्सर थी ….अब बार बंद हो गए …. तो भूखो मरने की नौबत आ गयी हैं। इसलिए अपने गाँव जा रही हूँ।” उसने बड़ी बेबाकी से कहा।
वह औरत उसका जवाब सुन कर ..आँखे फाड़ फाड़ कर उसे देखने लगी . अपनी बच्ची को ( जो उस युवतीके बर्थ पर लेटी थी) को फ़ौरन अपनी तरफ खींच लिया .
युवती व्यंग से हँसती हुए बोली ,” क्या हुआ मैडम , डांस करके पेट पालती हूँ …बीमार माँ और अपंग छोटेभाई की देखभाल करती हूँ . इतना भी तो बुरा काम नहीं है बार डाँसर होना .”
उस युवती ने कटाक्ष करते हुए कहा, “ जब बड़े पर्दे पर हीरोइनों के डांस देखते हो…. …कम कपड़ो में ….माधुरी से लेकर ऐश्वर्या …करीना तक …वह तो अच्छा लगता हैं . हम भी बस उन्ही के डांस की कॉपी करते हैं …वह भी पूरे कपड़ों में …तो हम इतने …अछूत और गंदे हो गए।”
तब तक एक और स्टेशन आ गया था।युवती की आँखों में बेचारगी वाले आँसू थे और वह औरत उससे मुँह फेर कर बैठी थी।
-0- गौतम कुमार सागर
 वरिष्ठ प्रबंधक ( बैंक ऑफ बड़ौदा )
gsagar6@gmail.com

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