अक्तूबर -2018

देशसंस्कार-उषा लाल     Posted: May 1, 2018

            नववर्ष के उपलक्ष्य में किट्टी-पार्टी के आयोजन में हम ऐसा थीम रखेंगे, जो हम-सबके लिए फायदेमंद हो । काफी सोच-विचार के बाद विषय चुना गया- ‘‘संस्कारों के निर्वहन में माँ की भूमिका’। नियत तिथि पर सभी महिला-मेम्बर क्लब में पहुँच गईं । एक दूसरे को नव वर्ष की मुबारकबाद दी, गले मिले, खाने-पीने का दौर चलता रहा, एक-एक सदस्य ने बड़े ही सुलझे तरीके से विचार व्यक्त किए, समय पर पार्टी खत्म हो गई और सभी हँसी-खुशी एक-दूसरे से विदा लेकर अपने घर की तरफ चल पड़ीं । रास्ते-भर कोई भी व्हीकल न मिलने के कारण शिल्पा काफी थक चुकी थी, सो घर पहुँचते ही सोफे पर पसर गई और घर के नौकर चन्दन को आवाज़ लगाई-‘चन्दन, ओ चन्दन, जल्दी से पानी ला, गला सूख रहा है ।’ चन्दन, जो दूसरे कामों में व्यस्त था, आवाज़ नहीं सुन पाया । उसे आता न देख शिल्पा ने फिर आवाज़ लगाई-‘चन्दन, ओ चन्दन, मर गया क्या ?’ चन्दन ने जैसे ही उसकी कड़कती आवाज़ सुनी, दौड़ता हुआ आया और पूछने लगा, ‘जी, बीबी जी!’ ‘बीबी जी के बच्चे, जल्दी से पानी ला, प्यास के मारे गला सूख रहा है ।’ वह दौड़ता हुआ गया और पानी का गिलास लाकर उसे थमा दिया । शिल्पा ने पानी पिया और आँखें बन्द करके आराम की मुद्रा में लेट गई । इतने में शिल्पा का चार वर्षीय बेटा नितिन स्कूल से आ गया । उसने भारी-भरकम बस्ता फर्श पर पटका और चिल्लाने लगा, ‘मम्मी, मुझे रोटी दो, भूख लगी है । मम्मी, रोटी दो, मुझे भूख लगी है । मम्मी, ओ मम्मी ! जागी हो या मर …… ।’ शिल्पा, जो उनींदी अवस्था में थी, झट से उठी और तमतमाए चेहरे से बोली – ‘बावा, ये क्या तरीका है मम्मी से बोलने का ?’ बावा ने भोलेपन से कहा – ‘मम्मी, मुझे रोटी दे दो, भूख लगी है’ और गले से लिपट गया। अचानक उसे चंदन से हुआ अपना वार्त्तालाप स्मरण हो आया। क्षण-भर पहले आया क्रोध काफू़र हो गया और वह रोटी देने चुपचाप रसोई की तरफ चली गई ।

-0-

-०-

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    chandanman2011@gmail.com

    रचनाएँ भेजने के लिए पता-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine