अक्तूबर -2018

देशकोहरा     Posted: July 1, 2018

बड़ा अफसर अपने कमरे में छोटे अफसरों की मीटिंग ले रहा था। बाकी सब तो ठीक चला, पर एक छोटे अफसर को बड़े अफसर की खूब लताड़ पड़ी। यह नहीं कि उस छोटे अफसर का काम खराब था। उसका काम दूसरे अफसरों से कहीं ज़्यादा बढ़िया था, पर उस अफसर की सबसे बड़ी कमी यह थी कि वह बहुत ईमानदार और सच्चा था। न वह बड़े अफसर के सामने दुम हिलाता था और न अपने साथी अफसरों के खिलाफ़ चुगली किया करता था। बस अपने काम से मतलब रखता था।

छोटे अफसर के पास बड़े अफसर की डाँट सुनने के अलावा और कोई चारा नहीं था। मीटिंग खत्म हुई, तो वह अपने साथियों से नज़रें चुराते हुए जल्दी से अपने कमरे की ओर चल पड़ा।

छोटा अफसर अपने कमरे के पास पहुँचा ही था कि सामने से उसे रमेश आता दीख गया। रमेश उसी दफ़्तर में क्लर्क था। रमेश के साथ कोई और भी था।

छोटे अफसर को देखते ही रमेश ने बड़ी नम्रता से उसे अभिभावदन किया और फिर कहने लगा, ‘‘सर, आपने मेरा जो कई सालों से अटका हुआ तनख़्वाह बढ़ने वाला केस क्लीयर किया था, उसका एरियर मुझे मिल गया है। पूरे अस्सी हज़ार मिले हैं। आपका बहुत-बहुत‘शुक्रिया, सर।’’

‘‘अरे, इसमें शुक्रिया, की क्या बात है। तुम्हारा जो हक बनता था, तुम्हें मिलना ही चाहिए वह।’’ छोटे अफसर ने मुलायम-सी आवाज़ में कहा और फिर अपने कमरे की ओर बढ़ चला।

चलते-चलते छोटे अफसर ने सुना। रमेश अपने साथी से कह रहा था, ‘‘ये सर बहुत ईमानदार हैं। इन जैसा ईमानदार मैंने कोई देखा नहीं अब तक।’’

छोटे अफसर के मन पर बड़े अफसर की लताड़ के कारण छाया सारा कोहरा एकदम से छँट गया।

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