नवम्बर-2017

चर्चा में24वाँ अंतर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन     Posted: December 1, 2015

कोटकपूरा (पंजाब) में सम्पन्न हुआ 24वाँ अंतर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन
लघुकथा विधा को समर्पित पंजाबी की त्रैमासिक पत्रिका ‘मिन्नी’ द्वारा ‘साहित्य सभा (पंजी), कोटकपूरा के सहयोग से ‘24वाँ अंतर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन’ कोटकपूरा के अग्रवाल भवन में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में पंजाब के अतिरिक्त हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश से बड़ी 1..संख्या में लेखक-लेखिकाओं ने भाग लिया। यह आयोजन स्व। श्रीमती ललिता अग्रवाल की स्मृति को समर्पित था। सम्मेलन की शुरुआत श्री भवानी शंकर गर्ग द्वारा पंजाबी के प्रसिद्ध शायर सुरजीत पातर की एक ग़ज़ल ‘मैं राहाँ ते नहीं तुरदा, मैं तुरदा हाँ ता राह बनदे’ (मैं बने बनाए रास्तों पर नहीं चलता, मैं चलता हूँ तो रास्ते बनते हैं) प्रस्तुत की गई। उसके बाद प्रथम सत्र का प्रारम्भ हुआ। साहित्य सभा, कोटकपूरा के संरक्षक श्री हरमिंदर सिंह कोहारवाला ने सम्मेलन में पधारे सभी रचनाकारों व अन्य अतिथियों का स्वागत किया।
श्रद्धांजलि सत्र में डा. बलराम अग्रवाल (दिल्ली), श्री रामकुमार आत्रेय(कुरुक्षेत्र), डा। श्याम सुन्दर दीप्ति (अमृतसर), श्याम सुन्दर अग्रवाल व सुश्री नीहारिका अग्रवाल द्वारा स्व। ललिता अग्रवाल के व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों पर रोशनी डालते हुए उनके परिवार, समाज व विशेषतया लघुकथा सम्मेलनों की व्यवस्था में उनकी सक्रिय भूमिका का ज़िक्र किया गया। स्व. ललिता अग्रवाल की पंद्रह वर्षीया पौत्री सुश्रीनीहारिका अग्रवाल द्वारा व्यक्त उद्गारों को सुनकर बहुत-से लोगों की आँखें नम हो आईं। अपनी दादी के प्रति निहारिका के उद्गारों के विडियो को फेसबुक पर अब तक पाँच सौ से अधिक लोगों द्वारा देखा जा चुका है। सभी उपस्थित लोगों द्वारा दो मिनट का मौन धारण कर स्व. ललिता अग्रवाल व स्व। कृष्णा मित्तल (धर्मपत्नी लघुकथाकार श्री मंगल कुलजिंद) को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्रद्धांजलि अर्पण के उपरांत समस्त अग्रवाल परिवार की ओर से श्रीमती मीरा अग्रवाल (दिल्ली) को प्रथम ‘ललिता अग्रवाल स्मृति सम्मान’ से नवाजा गया। इस सत्र का मंच संचालन बरेटा से पधारे सुप्रसिद्ध पंजाबी लघुकथाकार जगदीश राय कुलरियाँ द्वारा किया गया।
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दूसरे सत्र की अध्यक्षता सर्वश्री रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ (सोनीपत), सुभाष नीरव (दिल्ली), ब्रह्मजगदीश सिंह (पंजाबी आलोचक, फरीदकोट) व ज़ोरा सिंह संधू (उपन्यासकार व कहानीकार, कोटकपूरा) द्वारा की गई। डा। श्याम सुन्दर दीप्ति ने पत्रिका ‘मिन्नी’ व अंतर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलनों के इतिहास, उद्देश्य व लघुकथा उन्नयन में इनकी भूमिका का विस्तार से वर्णन किया। इसके साथ ही पत्रिका ‘मिन्नी’ के अंक-109 (अक्तूबर-दिसंबर, 2015; सं: डा। श्याम सुन्दर दीप्ति, श्याम सुन्दर अग्रवाल, बिक्रमजीत नूर, हरभजन खेमकरनी) व इसके संपादक मंडल द्वारा संपादित लघुकथा विधा से संबधित पुस्तक ‘पछाण व पड़चोल (भाग-1) को लोक-अर्पित किया गया। इस सत्र में लघुकथा विधा की कुछ अन्य पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ—‘पहचाण’ (गुरमीत सिंह बिरदी), ‘किरदी जवानी’ (सं: हरजिंदर पाल कौर कंग), ‘धुन्द चीरदी किरन’ (सं: डॉ। अशोक भाटिया), ‘साँझ’ (विवेक), ‘घाट पर ठहराव कहाँ’ (श्रीमती कान्ता रॉय), ‘भावुक मन की लघुकथाएँ’ (सं: प्रो. रूप देवगुण व डॉ। शील कौशिक), 3-pushkaranaDSCN0279‘हिन्दी की प्रतिनिधि लघुकथाएँ’ (सं: डॉ.रामकुमार घोटड़), ‘पंजाब से लघुकथाएँ’ (सं: डॉ. अशोक भाटिया) और ‘नन्हीं ओस के कारनामे’ (डॉ. राजकुमार निजात)। सम्मान सत्र में पंजाबी व हिन्दी भाषा में लघुकथा विधा को लेकर उल्लेखनीय कार्य करने वाले चार महानुभावों को सम्मानित किया गया। श्री रणजीत आज़ाद काँझला को ‘मिन्नी पत्रिका सम्मान’ से नवाजा गया। पंजाबी के चर्चित लेखक सतिपाल खुल्लर को ‘प्रिं. भगत सिंह सेखों स्मृति सम्मान’ दिया गया। लघुकथा विधा के क्षेत्र में पिछले चालीस वर्षों से निरन्तर कार्यरत डॉ.सतीशराज पुष्करणा को ‘श्री बलदेव कौशिक समृति सम्मान’ प्रदान किया गया तथा लघुकथा की ‘पड़ाव और पड़ताल’ 2-madhudeep6_oजैसी महत्त्वपूर्ण पुस्तक शृंखला प्रकाशित करने वाले कथाकार, संपादक व प्रकाशक श्री मधुदीप को ‘माता शरबती देवी स्मृति सम्मान’ से नवाजा गया। पंजाबी पत्रिका ‘अणु’ के संपादक श्री सुरिंदर कैले ‘डेंगु’ से पीड़ित होने के कारण ‘माता विद्यादेवी कालड़ा समृति सम्मान’ प्राप्त करने के लिए उपस्थित नहीं हो सके।
इस सत्र में ‘मिन्नी कहाणी लेखक मंच, अमृतसर’ की ओर से आयोजित ‘25वीं मिन्नी कहाणी लेखन प्रतियोगिता’ के विजेताओं सर्वश्री जगतार सिंह भाईरूपा, कुलविंदर कौशल, अमरजीत बठिंडवी, सुरजीत देवल, अमन अरमान, बूटा खान सुक्खी, श्रीमती सिम्मीप्रीत कौर, विवेक, परगट सिंह जम्बर को ‘मंच’ के अध्यक्ष श्री हरभजन सिंह खेमकरनी की ओर से पुरस्कार प्रदान किए गए।
KOTKAPURA-3सम्मान व पुरस्कार समारोह के बाद डॉ शील कौशिक ने अपना आलेख ‘बदलते समय में लघुकथा की महती भूमिका’ प्रस्तुत किया। इस आलेख पर श्री निरंजन बोहा, श्री रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’, सुभाष नीरव व प्रो। ब्रह्मजगदीश सिंह ने अपने विचार रखे। प्रो। ब्रह्मजगदीश सिंह ने कहा कि आलेख में लघुकथा संबंधी व्यक्त मुद्दों को अलग-अलग कर उन पर विस्तार से गहन आलोचनात्मक कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी की सराहना की। इस सत्र का मंच संचालन श्याम सुन्दर अग्रवाल ने किया।
दोपहर के भोजन के पश्चात् सम्मेलन के तीसरे व अंतिम सत्र ‘जुगनुआं दे अंगसंग’ के अध्यक्ष मंडल में सर्वश्री डॉ. अशोक भाटिया, सुभाष नीरव, निरंजन बोहा, व हरभजन खेमकरनी सुशोभित हुए। इस सत्र में हिन्दी व पंजाबी के चुनिंदा 35 लघुकथा लेखकों/लेखिकाओं द्वारा लघुकथा-पाठ किया गया। इन रचनाओं पर संपादक मंडल के अतिरिक्त प्रो. भूपिंदर सिंह जस्सल ने अपने विचार रखे। इस सत्र का संचालन भी श्री जगदीश राय कुलरियाँ ने किया।
अंत में साहित्य सभा, कोटकपूरा के अध्यक्ष श्री कुलदीप सिंह माणुके ने सम्मेलन में उपस्थित सभी रचनाकारों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन के सभी सत्र निर्धारित समय पर शुरू करके निर्धारित समय पर ही समाप्त किए गये। आयोजकों और सत्र संचालकों द्वारा बरती गयी इस सावधानी की प्रशंसा सम्मेलन में भाग लेने आए सभी लोगों ने मुक्त कंठ से की।
KOTKAPURA -5सम्मेलन में उपर्युक्त रचनाकारों के अतिरिक्त श्रीमती नीरज शर्मा व उनके सुपुत्र श्री अंकुर शर्मा (बिजनौर, उ. प्र.), श्री अशोक दर्द व उनकी पत्नी श्रीमती आशा देवी, श्री देवराज संजू (हिमाचल प्रदेश), श्री राधेश्याम भारतीय, श्री रंजीत टाडा, डॉ शक्तिराज कौशिक (हरियाणा), श्रीमती शकुंतदीप (दिल्ली), श्रीमती नीलम पुष्करणा (पटना, बिहार), श्री सत्यजीत रॉय (भोपाल, म।प्र।),डॉ राम कुमार घोटड़, श्री विजय कुमार (सादुलपुर, राजस्थान), श्रीमती उषा दीप्ति, श्रीमती उषा सरीन व श्रीमती सलोमी पैट्रिक (अमृतसर, पंजाब), श्री राहुल सिंह (होशियारपुर), श्री रघबीर सिंह महमी (पटियाला,), सर्वश्री सुखचैन थांदेवाला, सुंदरपाल प्रेमी, राजिंदर नागी, लाल सिंह कलसी, इकबाल घारू, सुमित सेठी, रोहित सेठी, सतेश भूंदड़, संतोख भाणा (जिलाः फरीदकोट), श्री सुखचरन सिंह सिद्धु व श्री मलकीत सिंह (जिलाः फिरोजपुर), श्री बलविंदर सिंह ‘बेचैन’ (फाज़िल्का), श्रीमती राजदेवकौर सिद्धु, श्री गुरसेवक ‘चुघेखुर्द’, श्री जसवंत ‘जस्स’ (बठिंडा), सर्वश्री जसबीर ढंड, दर्शन सिंह बरेटा, बूटा राम माखा, श्रीमती शिखा गर्ग (जिलाः मानसा), सर्वश्री गुरमीत सिंह रामपुरी, गुरदेव सिंह घारू, मा. बोहड़ सिंह मल्लन, श्रीमती मीनाक्षी मनहर (जिलाः मुक्तसर), सर्वश्री जसकरन , डॉ. साधू राम लंगेआना, जसवीर भलूरिया, कंवलजीत भोला, जगदीश प्रीतम, जगमीत सिंह गिल्ल, सरवण सिंह ‘पतंग’ (जिलाः मोगा), सर्वश्री खुशवंत बरगाड़ी, डॉ। परमिंदर सिंह तग्गड़, जगजीत सिंह प्यासा, बलजिंदर भारती, जंगपाल सिंह, जगदीप हसरत, जगीर सद्धर, देव वांदर जटाना, मनदीप कैंथ, रणजीत सिंह कंवल, मेघराज शर्मा, गुरप्यार हरीनौ, कुलविंदर जज, नारायण सिंह मंघेड़ा सहित अन्य अनेक स्थानीय लेखकों ने भाग लिया। सम्मेलन में लेखकों के अतिरिक्त अग्रवाल परिवार के सदस्यों, संबंधियों, सहयोगियों व शुभचिंतकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
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प्रस्तुति –श्याम सुन्दर अग्रवाल , कोटकपुरा ( पंजाब)

गतिविधियाँ

  • चर्चा में

    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
    rdkamboj@gmail.com

    रचनाएँ भेजने के लिए पता-:-
    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-
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    -सम्पादक द्वय

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