अगस्त-2017

देशकुत्ता     Posted: August 1, 2015

हमेशा की तरह अत्यधिक मदिरापान की खुमारी से सोकर उठे पिता ने पुत्री से कहा, ‘‘अरी ओ! पेट जल रहा है, दो–एक रुपए तो निकाल, जरा चाय–पानी हो जाए।’’
एक बेनाम लेकिन गहरी ईर्ष्या से पुत्री ने पूछा, ‘‘मेरे पास कहाँ रुपैया….’’
पिता को गुस्सा आया। वह जोर–जोर चिल्लाया, ‘‘तेरे पास रुपया नहीं है तो फिर रात–भर कुत्ता क्यों भौंका?’’
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गतिविधियाँ

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    हरियाणा साहित्य-संगम में लघुकथा पर विचार -विमर्श( सुकेश साहनी और राम कुमार आत्रेय की भागीदारी ।)
    लघुकथा अनवरत-2017 का विश्व पुस्तक मेले में अयन प्रकाशन के स्टाल पर विमोचन।

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    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)

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    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
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