जून 2026

देशअंकुरण     Posted: April 1, 2024

जैसे- तैसे करके, नाश्ता बनाकर पति और बेटे को खिलाकर, लंच पैक देकर विदा किया और वह निढाल- सी कुर्सी पर बैठ गई। सुबह से ही उन्हें कमजोरी के साथ चक्कर महसूस हो रहे थे। शायद बी.पी. बढ़ा हुआ था। किचन से लेकर बेडरूम तक बिखरे घर को व्यवस्थित करने की सोच ही रही थी कि शरीर ने साथ न देकर, उनके इस विचार पर विराम लगा दिया। दवा खाकर थोड़ी देर आराम करने के लिए वह सोफे पर लेट गई।
दीवार पर टँगी महीने भर पहले शादी होकर विदा हुई, बेटी की बचपन की फोटो को देखकर, बरबस आँखे नम हो गईं। बेटी ने शादी के पहले, पूरे घर की जिम्मेदारी को कितनी अच्छी तरह से सँभाल रखा था! सोचते हुए उनकी आँख कब लग गई उसे पता ही नहीं चला।

“मॉम.. उठिए”- बेटे की आवाज सुन उसकी नींद टूटी। वह हड़बड़ाकर उठ बैठी।
“अरे! चार बज गए? तुम स्कूल से आ भी गए, मुझे तो पता ही नहीं चला।”
“रिलेक्स. .. कोई बात नहीं मॉम।”
“अभी कुछ बनाकर देती हूँ, तुम्हें भूख लगी होगी।”- कहकर वह जल्दी से किचिन में चली आई। उसने जो देखा, हैरत से देखती रह गई। सिंक में पडे गंदे पड़े बर्तन, धुले हुए, करीने से अपनी जगह पर रखे होने के साथ, पूरा साफ- सुथरा किचन, खाने की खुशबू से महक रहा था। उन्होंने नोटिस किया कि किचन के साथ पूरा घर भी व्यवस्थित था। साथ ही उसने देखा कि बेटे के स्कूल से आने के बाद, हमेशा इधर- उधर बिखरे, रहने वाले जूते, कपड़े आदि अपनी सही जगह पर रखे थे। यह सब देखकर उन्हें सुखद आश्चर्य हुआ।
“मॉम! …आज मैंने पहली बार मैगी बनाई है, चलो मिलकर खाते हैं। मेरी तरह आपको भी बहुत भूख लगी होगी।”- पीछे से आकर बेटे ने कहते हुए प्यार से उनके गले में बाहें डाल दीं।
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