तबीयत ठीक होने पर, दो दिन की छुट्टी के बाद आज ऑटो से विश्वविद्यालय जाते समय, आरती परेशान-सी थी। कोरोना के कारण पति की छूटी नौकरी, बढ़ी मंहगाई, बच्चों के स्कूल की फ़ीस आदि तमाम बातें उसे विचलित कर रही थीं। उसे इस बात पर भी चिढ़ हो रही थी कि उसकी तबीयत क्यों ख़राब हुई? छुट्टी के कारण दो दिन की पगार का नुक़सान उसकी चिंताओं को और बढ़ा रहा था। संविदा पर अध्यापन की नौकरी से प्रतिदिन कार्य के हिसाब से मिलने वाली छोटी-सी तनख़्वाह उसके लिए आय का एक मात्र सहारा थी, जो अँधेरे में किसी किरण के समान थी। वो चेहरे से चिंता की लकीरें हटाकर सामान्य दिखने की कोशिश करने लगी।
कुछ सोच कर उसके चेहरे पर एक मुस्कान आई, ‘सभी डेली वेजेज़ वाले तो छुट्टी लेते हैं पर छुट्टी के बाद जॉइन करते समय सारी छुट्टियों वाले दिन की भी उपस्थिति रजिस्टर पर दिखा देते हैं और पूरे महीने की पगार पा जाते हैं, उन्हें तो कोई कुछ नहीं कहता, ज़रूर ऊपर के अधिकारियों को कुछ पैसा बाँटते होंगे, तभी ये लोग अधिकारियों के चहेते भी हैं’। उसने सोचना जारी रखा, ‘मैं भी आज ऐसा ही करूंगी, दो दिन की छुट्टी को उपस्थित दिखाउंगी, ज़रूरत पड़ी तो कुछ पैसे ऊपर बाँट दूँगी, महँगाई बहुत है, घर की जरूरतें बहुत हैं, इतनी ईमानदारी का क्या ईनाम मिलना है मुझे? दो हज़ार में दूध वाले का भुगतान तो हो ही जायेगा, कुछ राशन का भी सामान आ जायेगा’। तभी उसकी अंतरात्मा ने उसे झिंझोड़ा, ‘आरती, तूने पिछले छः वर्षों से ऐसा नहीं किया है। सबकी बेईमानी देखकर भी तेरा ईमान कभी नहीं डोला, आज तू बेईमानी का सोच रही है’? उसके चेहरे पर तरह-तरह के हाव-भाव आ-जा रहे थे। विश्वविद्यालय प्रांगण से सौ मीटर की दूरी पर ऑटो से उतर कर पैदल जाते हुए उसने अपनी अंतरात्मा से बहस करते हुए निर्णय किया, ‘आज से वो भी ‘जैसा देश, वैसा भेष’ के सिद्धांत पर चलेगी, सभी फ़र्ज़ी उपस्थिति से पैसे कमाते हैं, वो भी कमाएगी, कुछ बुरा नहीं है इसमें, किसी की जेब से पैसा थोड़े ही निकाल रही है’। यह अंतिम निर्णय लेते ही उसके चेहरे पर एक संतुष्टि का भाव था। टेबल पर रखे उपस्थिति रजिस्टर खोलकर उसने पिछले दो दिन की उपस्थिति दिखाने के लिए थोड़ा डरते हुए अंग्रेज़ी का ‘पी’ लिखना चाहा पर क़लम ने हिम्मत से अंग्रेज़ी का ‘एल’ लिखवा दिया। स्टाफ रूम में अपनी कुर्सी पर बैठी आरती के चेहरे पर आज-सी संतुष्टि और ख़ुशी शायद किसी ने पहले नहीं देखी थी।
-0-मनीष श्रीवास्तव ‘बादल’, पता – फ़्लैट न. टॉप – 3, नर्मदा ब्लॉक, अल्टीमेट कैंपस,शिर्डीपुरम (साईं बाबा मंदिर के पास), कोलार रोड,भोपाल- 462042 म.प्र.
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