जून 2026

देशअछूत खून     Posted: August 1, 2019

‘‘रुको बहू, रसोई घर में मत घुसना। चौका छूत हो जाएगा।’’

 ‘‘भला क्यों दादीजी? आज तो मैं आपकी पसन्द के मूँग के कबाब और मखाने की खीर बनाने जा रही हूँ। सिर धोकर नहाई हूँ।’’ लाड़ली पोत-बहू ने इतराकर कहा।

 शुभा कल ही शैवाल के साथ आगरे आई। गोद में छह महीने का शुभम् था। शुभम् के होने में वह मरते-मरते बची। समय से पहले अचानक भयंकर ब्लीडिंग शुरू हो गई। घर में अकेली होने से अस्पताल पहुँचने में बहुत देर हो गई। डाक्टर ने तुरन्त आपरेशन करके मुश्किल से जच्चा-बच्चा की जान बचाई। शुभा का ब्लड ग्रुप आर.एच. निगेटिव था। मैचिंग खून मिलने में भी समय लगा। ददिया सास को परपोते का मुँह देखने का बड़ा चाव था।‘‘मरने से पहले तू मेरी गोदी में परपोता दे मुझे ‘‘सरगनसैनी’ चढ़ने की खुशी में सोने की अँगूठियाँ दी थी। आगरे आने से पहले उसने भी शैवाल के पीछे पड़ दादी जी के लिए अँगूठी खरीदी थी और नन्ही-सी चाँदी की सीढ़ी पर सोने का पानी करवा के लाई थी। परपोते को दादी की गोदी में देकर अँगूठी पहनाई और हँसकर कहा, ‘‘दादी जी शुभं इस सीढ़ी को कसकर पकड़कर खड़ा रहेगा और आप स्वर्ग चढ़ जाइएगा।’’

          दादी जी का वर्जना सुन रुआँसी शुभा वहाँ से हट गई। शैवाल पास ही खड़ा था। ‘‘क्या बात है दादी? कल तक जिस बहू का इस खानदान में कोई सानी नहीं था, आज अचानक वही दुलारी बहू अछूत कैसे हो गई।’’

          बहू को जचकी के बाद खून चढ़ाया गया था?’

          ‘‘हाँ ब्लीडिंग इतनी हुई थी कि इसकी जान के लाले पड़ गए थे। छह बोतल खून चढ़ाया तब इसमें जान आई। यह तो ईश्वर की बड़ी कृपा हुई जो दोनों मेरे पास हैं।’’

          ‘‘खून कहाँ से मिला?’’

          ‘‘मुझे पता नहीं। अस्पताल ने इन्तजाम किया। उसका मैंचिंग खून बड़ी मुश्किल से मिला।’’

          ‘‘कितने का खून आया था?’’

          ‘‘अब याद नहीं। शायद छह हजार का था।’’

          ‘‘जब इतना खर्च किया तो दो तीन हजार और देकर किसी ऊँची जाति का खून खरीदते। भंगी का खून चढ़वाने की क्या जरूरत थी।’’

          शैवाल को हँसी आ गई-“हमें पता नहीं कुछ और तुम्हें मालूम हो गया कि वह भंगी का खून था। और अगर था भी तो लाल ही रंग का, काला रंग नहीं। फिर तो दादी यह तुम्हारा पर-पोता भी तो अछूत हो गया। अछूत माँ का दूध जो पी रहा है।’’

          ‘‘प्रवाल बहू को देखकर पूना से जब आया तो उसने हमें बताया था कि भाभी के छह बोतल खून भंगी का चढ़ाया गया है। मैंने उसे मना कर दिया है किसी और को यह बात नहीं मालूम है। पर मैं तो इस बुढ़ापे में अपना धर्मभ्रष्ट नहीं कर सकती। रही शुभं की बात सो मर्द बच्चा है उसे कैसी अछूत।’’

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