गर्मी की छुट्टियों का मज़ा लेते हुए और अपनी शैतानियों में चार चाँद लगाते हुए चिंटू और चिंकी इंदौरी कुल्फी का मज़ा ले रहे थे ।
बुआ … ये खजूरी बाज़ार क्या है ? – चिंटू ने भोलेपन में पूछा ।
बुआ – अरे बेटा, यह एक जगह का नाम है ।
अरे ! ऐसा नाम…. इतना अजीब ।
हाँ, वहाँ पर पहले बहुत सारे खजूर के पेड़ थे इसलिए…
ओह ! तो फिर ये नवलखा का क्या मतलब……
चिंकी …..कितने अजीब नाम है तुम्हारे शहर की जगहों के….ही ..ही … ही ..
चिंटू तू तो रहने दे… तेरे शहर का तो नाम ही बड़ा अजीब है – वड़ोदरा … अब भला यह क्या नाम हुआ ?
इतने में बुआ बोल पड़ी – अरे बेटा ! नवलखा नाम इसलिए पड़ा ; क्योंकि एक ज़माने में वहाँ पर नौ लाख पेड़ हुआ करते थे …
ओह ! ….नौ लाख …. सच में ! वाह… !!!
और वड़ोदरा ,यानी जहाँ पर हर जगह बहुत सारे वड़ या बड़ के पेड़….
देखे हैं न तुम दोनों ने बरगद के पेड़ ? बोलो …
इतने सारे पेड़ ! हर जगह !
तो अब वो पेड़ कहाँ गए ? ….. – दोनों बच्चे एक साथ बोल पड़े ।
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