चार दिन हुए रजनी को मायके आए ,भाभी रोज नए-नए पकवान बना-खिला रही हैं ,ननद इतने सालों बाद जो आई है । मगर आज रजनी ने भाभी को हटा रसोई पर खुद कब्जा किया है ,आज वह सबकी पसंद का बनाएगी ,खिलाएगी । अर्सा हुआ ,मायके की रसोई में घुसे ।
“आप ही का है सब ,बनाइए-खिलाइए …आज हम भी मौज करते हैं ।” हँसते हुए भाभी रसोई से निकल अपनी सिलाई मशीन लेकर बैठ गईं ।
खूब रचपचकर भाई की पसंद की खीर ,आलू की कचौड़ी,खट्टा-मीठा काशीफल ,उबले आलू की खूब चटक ,रसेदार तरकारी, बूंदी का चटपटा ,झन्नाटेदार रायता जिसे गांव में सब सन्नाटा बुलाते ,और गरम-गरम पूड़ियाँ बना रही है रजनी । सब रस ले लेकर ,उंगलियां चाटते हुए खाए जा रहे हैं । सबके खाने के बाद रजनी उत्साह से भर उठी है। हिम्मत कर ,जतन से थाली परस रसोई से निकली।
“भाभी!सामने छोटे भैया को भी दे आऊँ ? छोटी भाभी भी मायके गई हैं न । खुद ही बना-खा रहे हैं ।”कहते हुए रजनी हिचक गई ।
“दीदी! अपने भैय्या से पूछ लीजिए !” कहकर भाभी ने मशीन का चक्का तेजी से घुमा दिया ।
थोड़ी देर पहले के भाभी के शब्द रजनी के कानों में गूँज उठे -आप ही का है सब ,बनाइए-खिलाइए….।
-0-ए-10,सूर्या अपार्टमेंट ,कटोरा तालाब ,नेताजी चौक ,सिविल लाइंस ,रायपुर (छत्तीसगढ़)
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-0-Singh
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